पिछले दिनों की बारिश, हिमपात का अब दिख रहा असर, चम्पावत में शून्य तो अल्मोड़ा में एक डिग्री पहुंचा तापमान

बुधवार को कुमाऊं में सबसे कम तापमान चम्पावत जिले में दर्ज किया गया। लोहाघाट का तापमान 0.4 डिग्री दर्ज किया गया। अल्मोड़ा का पारा 1.1 डिग्री के स्तर पर पहुंच गया है। पिथौरागढ़ के तापमान में एक डिग्री की कमी आई है।

Prashant MishraPublish:Thu, 09 Dec 2021 07:57 AM (IST) Updated:Thu, 09 Dec 2021 07:57 AM (IST)
पिछले दिनों की बारिश, हिमपात का अब दिख रहा असर, चम्पावत में शून्य तो अल्मोड़ा में एक डिग्री पहुंचा तापमान
पिछले दिनों की बारिश, हिमपात का अब दिख रहा असर, चम्पावत में शून्य तो अल्मोड़ा में एक डिग्री पहुंचा तापमान

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : पिछले दिनों हुए बारिश व हिमपात का असर अब दिखना शुरू हो गया है। आसमान साफ होने की वजह बर्फीली हवाओं ने तापमान में कमी ला दी है। बीते 24 घंटे के दौरान तापमान में तीन से चार डिग्री तक की कमी आई है। बुधवार को कुमाऊं में सबसे कम तापमान चम्पावत जिले में दर्ज किया गया। लोहाघाट का तापमान 0.4 डिग्री दर्ज किया गया। अल्मोड़ा का पारा 1.1 डिग्री के स्तर पर पहुंच गया है। पिथौरागढ़ के तापमान में एक डिग्री की कमी आई है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि अगले तीन दिन आसमान साफ रहेगा। मौसम शुष्क रहेगा। हवा की गति से तीन से चार किमी प्रति घंटे रह सकती है। फिलहाल आने वाले दिनों में ठंड से राहत की उम्मीद कम है। दिन में धूप खिलने से राहत रहेगी। 

दो दिनों में ऐसे बदला न्यूनतम तापमान 

स्थान          7 दिसंबर     8 दिसंबर 

नैनीताल        7.0          6.5 

अल्मोड़ा        5.6         1.1

बागेश्वर        9.3          6.6

पिथौरागढ़       4.2         3.3

चम्पावत        2.0         1.2

लोहाघाट        3.5         0.4

पंतनगर         10.7        10.4

हल्द्वानी         15.3        14.8

मुक्तेश्वर        5.3         4.6

बारिश में उधड़ी सड़क नहीं सुधरने से रोष 

पिथौरागढ़ जिले के धारचूला तहसील क्षेत्र की कालिका-खुमती सड़क पिछले पांच वर्ष से बदहाल स्थिति में है। सड़क में डामर कम गड्ढे ज्यादा हैं। लोगों को आवागमन में खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है। एक दशक पूर्व बनी सड़क किनारे नालियां नहीं होने से पानी सड़कों पर ही बहता आ रहा है, जिससे सड़क पर लगा डामर उखड़ चुका है। डामर उखड़ जाने से सड़क में गड्ढे ही गड्ढे बने हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण सिंह का कहना है कि सड़क से हर रोज दर्जनों वाहन आवागमन करते हैं। तहसील मुख्यालय पहुंचने के लिए लोगों के पास यही एकमात्र विकल्प है।