वनराजियों में फैली भ्रांति से खड़ी हुई समस्या, तमाम कोशिशों के बाद भी सिर्फ 20 लोगों ने कराया टेस्ट

उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी ग्राम प्रधान खेतार कन्याल महेश सिंह कन्याल ने महिलाओं से अपना सैंपल देने को कहा तो वे भड़क गई। महिलाओं ने सैंपल देने से साफ इंकार कर दिया। महिलाओं ने कहा कि वे अन्य समुदाय से अलग रहते हैं और जड़ी बूटियां उनका आहार हैं।

Prashant MishraSat, 29 May 2021 04:53 PM (IST)
बमुश्किल 20 लोग सैम्पलिंग के लिए तैयार हुए।

जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़: प्रदेश की एकमात्र आदिम जनजाति वनराजियों में फैली भ्रांति को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। वनराजि कोरोना की सैंपलिंग के लिए तैयार नहीं हो रहे हैं। एसडीएम की अगुवाई में वनराजियों के गांव पहुंचे प्रशासनिक अमले और पंचायत प्रतिनिधियों के कड़ी मशक्कत के बाद कुल 20 लोग ही सैम्पलिंग के लिए आगे आए। प्रशासन अब इन विशेष जनजाति के लोगों को समझाने के लिए फिर से कवायद करेगा।

आदिम जनजाति वनराजि में कोरोना की आशंका को लेकर जिलाधिकारी ने डीडीहाट और धारचूला के उपजिलाधिकारियों को गांव में शिविर लगाकर कोरोना सैम्पलिंग कराने और स्वास्थ की जांच करने के निर्देश दिए थे। शेष समुदाय से अलग रहने वाले इस समुदाय की जांच के लिए पहले दिन कूटा गांव में शिविर लगाया गया, लेकिन वहां एक भी वनराजि जांच के लिए नहीं पहुंचा। एक भी व्यक्ति के आगे नहीं आने पर तहसील प्रशासन अलर्ट हो गया। दूसरे मदनपुरी गांव में शिविर लगाया गया, जिसमें खुद उप जिलाधिकारी केएन गोस्वामी पहुंचे। शिविर में वनराजि पुरूष फिर भी नहीं आए। शिविर में खाद्यान्न वितरण भी होना था, जिस पर बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंच गई।

उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी, ग्राम प्रधान खेतार कन्याल महेश सिंह कन्याल ने महिलाओं से अपना सैंपल देने को कहा तो वे भड़क गई। महिलाओं ने सैंपल देने से साफ इंकार कर दिया। महिलाओं ने कहा कि वे अन्य समुदाय से अलग रहते हैं और जंगलों में होने वाली तमाम जड़ी बूटियां उनका आहार हैं। ऐसे में उन्हें कोरोना हो ही नहीं सकता। प्रशासन ने धारचूला तहसील में एक महिला की मौत का हवाला देते हुए जांच के लिए कहा, महिलाएं फिर भी तैयार नहीं हुई और शिविर छोड़कर चली गई।

उपजिलाधिकारी के निर्देश पर सरकार विभागों के कार्मिक और ग्राम प्रधान वनराजियों के घरों में पहुंचे और उन्हें टीकाकरण के लिए समझाया। इस पर बमुश्किल 20 लोग सैम्पलिंग के लिए तैयार हुए। उपजिलाधिकारी केएन गोस्वामी ने कहा है कि वनराजियों को सैम्पलिंग के लिए फिर से समझाया जाएगा।

ये हैं भ्रांतियां

1. कोरोना की जांच में सभी लोगों की रिपोर्ट पाजीटिव आती है।

2. पाजीटिव आने पर उन्हें 10 दिन के लिए अस्पताल भेज दिया जाता है।

3. अस्पताल में सफेद कपड़े(पीपीई) किट पहनाकर रखा जाता है।

4. टीकाकरण करने पर बुखार आता है और जोड़ दुखने लगते हैं।

5. टीकाकरण के बाद आदमी शारीरिक रूप से कमजोर पड़ जाता है।

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