48 घंटे के भीतर अपना ही आदेश पलटकर विवादों में घिरे STH प्राचार्य, दोबारा डा. भुवन को दी एचओडी की जिम्मेदारी

प्राचार्य ने सर्जरी विभाग के एचओडी बदलने के अपने पिछले आदेश को रद करते हुए पुरानी व्यवस्था यथावत रखने की बात कही है। ऐसे में डा. भुवन सर्जरी विभाग के हेड बने रहेंगे। वहीं डा. राजीव सिंह बिना पदभार ग्रहण किए एचओडी के पद से हटा दिए गए।

Prashant MishraFri, 18 Jun 2021 06:38 AM (IST)
प्राचार्य डा. भैंसोड़ा ने नए आदेश की पुष्टि की। हालांकि इसकी वजह पूछने पर उन्होंने स्पष्ट कुछ नहीं कहा।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : विभागाध्यक्ष की तैनाती के आदेश को 48 घंटे के भीतर बदलकर राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी के प्राचार्य खुद विवादों में घिर गए हैं। प्राचार्य ने सर्जरी विभाग के एचओडी बदलने के अपने पिछले आदेश को रद करते हुए पुरानी व्यवस्था यथावत रखने की बात कही है। ऐसे में डा. भुवन सर्जरी विभाग के हेड बने रहेंगे। वहीं डा. राजीव सिंह बिना पदभार ग्रहण किए एचओडी के पद से हटा दिए गए।

राजकीय मेडिकल कॉलेज का सर्जरी विभाग पांच-छह वर्षों से विवाद से घिरा रहा है। पिछले साल सितंबर में डा. केएस साही के अल्मोड़ा स्थानांतरण होने के बाद विभागाध्यक्ष को लेकर ताजा विवाद शुरू हुआ। तब प्राचार्य ने एसोसिएट प्रोफेसर डा. भुवन को विभागाध्यक्ष बनाया था। इसके बाद प्रोफेसर बने डा. राजीव कुमार सिंह एचओडी बनाए जाने को लेकर प्राचार्य से पत्राचार करने लगे।

15 जून को प्राचार्य ने कांट्रेक्ट पर कार्यरत प्रोफेसर डा. राजीव सिंह को विभागाध्यक्ष बनाने का आदेश जारी किया। हालांकि वह पदभार ग्रहण नहीं कर पाए। गुरुवार को प्राचार्य डा. सीपी भैंसोड़ा ने 15 जून के आदेश को रद करते हुए 11 सितंबर, 2020 के आदेश को यथावत रखने की बात कही है। प्राचार्य डा. भैंसोड़ा ने नए आदेश की पुष्टि की। हालांकि इसकी वजह पूछने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा।

आदेश में नामों का नहीं किया उल्लेख

प्राचार्य ने अपने गुरुवार के आदेश में दोनों डाक्टरों के नामों का उल्लेख नहीं किया है। आदेश संख्या का हवाला देते हुए संक्षेप में 15 जून, 2021 के आदेश को अतिक्रमित करने की बात लिखी है।

इस वजह से विवाद से घिरे प्राचार्य

एचओडी की तैनाती के मामले में प्राचार्य ने शासन ने दिशा-निर्देश मांगे। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक डा. पंकज कुमार पांडे ने 20 मई के पत्र में लिखा है कि यह प्रकरण कॉलेज स्तर का है। परंपरागत प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष नामित किया जाता है। एचओडी नामित करने को लेकर निदेशालय व शासन स्तर पर कोई गाइडलाइन नहीं है। गाइडलाइन नहीं होने के तथ्य को आधार बनाकर स्थायी को हटाकर कांट्रेक्ट पर कार्यरत प्रोफेसर को एचओडी बनाकर प्राचार्य विवाद में घिर गए।

कार्यालय पर महीनों रहा ताला

पिछले साल सितंबर में डा. साही का अड़ा स्थानांतरण होने के बाद चाबी नहीं होने से कार्यालय नहीं खोला जा सका। डा. भुवन ने एचओडी का कार्यालय खुलवाने को लेकर प्राचार्य को पत्र लिखा। टालमटोल के बाद आठ माह बाद उन्हें चाबी दिलवाई गई। डा. भुवन ने 15 जून के आदेश को नियम विरूद्ध बताते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी थी। दो दिन में ही आदेश रद हो गया।

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