कांग्रेस के चारों कार्यकारी अध्यक्ष अलग-अलग सीटों से दावेदार भी, पार्टी संग खुद को भी है चमकाना

बड़ा सवाल यह है कि जिन चार वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है वह अलग-अलग सीटों से खुद भी दावेदारी के मूड में हैं। टिकट पर हाईकमान से हामी मिलने पर उन्हें डबल जिम्मेदारी निभानी होगी। यानी खुद के साथ उम्मीदवारों के पक्ष में भी माहौल बनाना होगा।

Prashant MishraFri, 23 Jul 2021 09:46 PM (IST)
दस दिन में हरदा उत्तराखंड आ सकते हैं। उसके बाद बैठक व रणनीति बनाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : कांग्रेस हाईकमान ने गुरुवार रात पंजाब की तर्ज पर अध्यक्ष समेत चार कार्यकारी अध्यक्ष उत्तराखंड में नियुक्त कर दिए। समीकरण के लिहाज से यह फार्मूला सटीक है। जिम्मेदारी का दायरा बढऩे से चुनाव के दौरान नई रणनीति तैयार करने में मदद भी मिलेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जिन चार वरिष्ठ नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है, वह अलग-अलग सीटों से खुद भी दावेदारी के मूड में हैं। टिकट पर हाईकमान से हामी मिलने पर उन्हें डबल जिम्मेदारी निभानी होगी। यानी खुद लडऩे के साथ पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में भी माहौल बनाना होगा।

दिल्ली में हुए अंतिम फैसले के बाद श्रीनगर के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को पीसीसी चीफ बनाया गया, जबकि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तिलकराज बेहड़, पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष व मंडी सभापति भुवन कापड़ी, पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत व प्रोफेसर जीतराम को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। सूत्रों की माने तो चारों कार्यकारी अध्यक्ष पुरानी सीट से चुनाव लडऩे की तैयारी में जुटे थे। बेहड़ की नजर किच्छा सीट पर भी है। सभी की अपने क्षेत्र में पकड़ भी अच्छी है, मगर अब पार्टी ने बड़ी जिम्मेदारी देकर कांग्रेस के पक्ष में परिणाम लाने का दारोमदार सौंपा है। ऐसे में चुनावी संग्राम शुरू होते ही इन्हें भी कई चुनौतियों से पार पाना होगा। उत्तराखंड में कांग्रेस को काफी मशक्कत करनी होगी। अभी तक पार्टी के नेता भाजपा से लडऩे के बजाय आपस में ही खींचतान कर रहे थे। नई कार्यकारिणी के गठन से अब खुद के साथ ही पार्टी की छवि को चमकाने की जिम्मेदारी रहेगी।

हरदा की 10 दिन बाद वापसी

चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष व पूर्व सीएम हरीश रावत ने बतौर प्रभारी पंजाब में कांग्रेस के अंदरूनी घमासान को सुलझा लिया है। करीबियों के मुताबिक दस दिन में हरदा उत्तराखंड आ सकते हैं। उसके बाद चुनाव को लेकर बैठक व रणनीति बनाने का सिलसिला शुरू हो जाएगा।

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