एसटीएच कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर जताया विरोध

कर्मचारियों ने पीपीई किट पहना हुआ था। उसमें लिखा था कोरोना योद्धाओं का अपमान करना बंद करे सरकार। एसटीएच उपनल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पीएस बोरा ने कहा कि हमारी जायज मांगें है। सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए।

Prashant MishraPublish:Sat, 16 Oct 2021 07:33 PM (IST) Updated:Sat, 16 Oct 2021 07:33 PM (IST)
एसटीएच कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर जताया विरोध
एसटीएच कर्मियों ने पीपीई किट पहनकर जताया विरोध

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के उपनल कर्मचारी अब विरोध के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। शनिवार को कर्मचारियों ने पीपीई किट पहनकर डिवाइडर पर बैठ गए और विरोध जताने लगे। कर्मचारियों ने कहा कि सरकार हमारे साथ अन्याय कर रही है।

डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के उपनल कर्मचारी डेढ़ महीने से आंदोलनरत हैं। समान कार्य समान वेतन व नियमितिकरण की मांग को लेकर सरकार ने केवल दो से तीन हजार रुपये बढ़ाने का फैसला लिया है। कर्मचारी सरकार के इस फैसले से आहत हैं। उनका कहना है कि 10 से 15 वर्ष से कार्यरत हैं। कोविड काल में पूरी ड्यूटी की। जान जोखिम में डालकर भी शांति से काम करते रहे। तब हमारी जरूरत थी। हम पीछे नहीं हटे। अब सरकार हमें दो से तीन हजार रुपये देकर झुनझुना थमा रही है। यह घोर अन्याय है। कर्मचारियों ने पीपीई किट पहना हुआ था। उसमें लिखा था, कोरोना योद्धाओं का अपमान करना बंद करे सरकार। एसटीएच उपनल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पीएस बोरा ने कहा कि हमारी जायज मांगें है। सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए। आखिर हम कब तक इस तरह की जलालत झेलते रहेंगे।

अस्पताल का काम हो रहा प्रभावित, नहीं किसी को चिंता

एसटीएच में उपनलकर्मियों की हड़ताल की वजह से काम प्रभावित है। बाहर से कर्मचारियों को बुलाकर सफाई करवाई जा रही है। सबसे अधिक प्रभाव अस्पताल में भर्ती मरीजों पर पड़ रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने आंख मूंद रखी है। आपरेशन करने वाले मरीजों की संख्या कम हो गई है।

स्टाफ नर्स पर भी काम का बोझ

एसटीएच में अधिकांश स्टाफ नर्स उपनल से ही कार्यरत हैं। यही कारण है कि इसका प्रभाव मरीजों पर पड़ रहा है। एक वार्ड में दो से अधिक नर्स होने चाहिए थे, लेकिन इस समय एक ही है।