गीतों का उत्तराखंड की राजनीति व आंदोलनों से रहा है पुराना नाता, जानिए

गीतों का उत्तराखंड की राजनीति व आंदोलनों से रहा है पुराना नाता

लोक गायिका माया उपाध्याय द्वारा पूर्व सीएम व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत पर बनाया गीत दो दिन बाद लांच होगा। मगर अभी से सियासी हलचलें तेज हो गईं हैं। वहीं उत्तराखंड के इतिहास पर गौर करें तो गीतों का उत्तराखंड की राजनीति व आंदोलन से पुराना नाता रहा।

Publish Date:Tue, 26 Jan 2021 11:05 PM (IST) Author: Skand Shukla

हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : लोक गायिका माया उपाध्याय द्वारा पूर्व सीएम व कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत पर बनाया गीत दो दिन बाद लांच होगा। मगर अभी से सियासी हलचलें तेज हो गईं हैं। वहीं, उत्तराखंड के इतिहास पर गौर करें तो गीतों का उत्तराखंड की राजनीति व आंदोलन से पुराना नाता रहा। पूर्व सीएम स्व. एनडी तिवारी के कार्यकाल में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी द्वारा बनाया गाना "नौछमी नरेणा" सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा राजनैतिक गीत माना जाता है। 2007 में कांग्रेस को सत्ता से भी बाहर होना पड़ा था। वहीं, 2017 के चुनाव में कांग्रेस नेता मयूख महर पर युवा गायक पवनदीप राजन ने "गांव-गांव, शहर-शहर मयूख महर" गाना बनाया तो इंटरनेट मीडिया पर इसे काफी सुर्खियां मिली। लेकिन सिटिंग एमएलए मयूख पिथौरागढ़ सीट से चुनाव हार गए।

कांग्रेस इस समय अंदरूनी राजनीति चरम पर है। पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की बात कर रही है। जबकि पूर्व सीएम हरीश रावत का खेमा चाहता है कि हर हाल में हरदा के नाम फाइनल हो जाए। मीडिया-इंटरनेट मीडिया पर बयानबाजी के बाद अब गाने के जरिये हरीश रावत को आगे करने की रणनीति है। हालांकि, यह भविष्य ही बताएगा कि हरदा गुट को इससे कितना लाभ होगा। क्योंकि, पिछले विधानसभा चुनाव में "उत्तराखंड की चाहत, है हरीश रावत" गीत कोई करिश्मा नहीं कर पाया था।

तेरा जुल्मुकु हिसाब चुकौला एक दिन : दो अक्टूबर 1994 को दिल्ली कूच कर रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर रामपुर तिराहे के पास पुलिस ने कहर ढाया था। गोलियां मारने के साथ महिलाओं संग दुराचार तक किया गया। इस घटना के बाद लोकगायक नरेंद्र सिंह ने उत्तर प्रदेश सरकार की आंदोलन को बर्बरता से कुचलने वाली नीतियों के खिलाफ "तेरा जुल्मुकु हिसाब चुकौला एक दिन" गीत गाया था। नतीजन राज्य बनने के बाद से सपा हाशिये पर जाती रही। जनकवि गिरीश तिवारी "गिर्दा" ने कुमाउँनी जनगीतों द्वारा लोगों में जोश भरा था।

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