कुमाऊं की सात डिवीजन और एक सर्किल का अस्तित्व होगा समाप्त, वेस्टर्न सर्किल में पांच से दो डिवीजन करने की तैयारी

दक्षिणी सर्किल के पास अभी तीन डिवीजन थी मगर दो का अन्य में विलय होने पर सर्किल ही समाप्त कर दी जाएगी। एकमात्र नैनीताल डिवीजन वेस्टर्न सर्किल का हिस्सा होगी। वहीं कुमाऊं की अलग डिवीजनों से जुड़ी चार रेंज पौड़ी व बद्रीनाथ डिवीजन में समायोजित करने की तैयारी है।

Prashant MishraSat, 24 Jul 2021 07:06 AM (IST)
इस प्रस्ताव को लेकर कर्मचारी संगठनों में खासा आक्रोश है। रेंजर संघ ने आंदोलन पर जाने की चेतावनी दी है।

गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी : फॉरेस्ट डिवीजनों, सर्किल व रेंजों के पुनर्गठन के लिए अफसरों की ओर से बनाए गए फार्मूले के अनुसार कुमाऊं में सिविल सोयम प्रभाग मिलाकर सात डिवीजनों का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। दक्षिणी सर्किल के पास अभी तीन डिवीजन थी, मगर दो का अन्य में विलय होने पर सर्किल ही समाप्त कर दी जाएगी। एकमात्र नैनीताल डिवीजन वेस्टर्न सर्किल का हिस्सा होगी। वहीं, कुमाऊं की अलग-अलग डिवीजनों से जुड़ी चार रेंज गढ़वाल की पौड़ी व बद्रीनाथ डिवीजन में समायोजित करने की तैयारी है। फिलहाल इस प्रस्ताव को लेकर कर्मचारी संगठनों में खासा आक्रोश है। रेंजर संघ ने आंदोलन पर जाने की चेतावनी दी है।

उत्तराखंड वन प्रभाग में इन दिनों डिवीजन, सर्किल, प्रशासनिक इकाई, पटल व अनुभाग के ढांचे को नए सिरे से बनाने की तैयारी चल रही है। अफसरों व स्टाफ की कमी से जूझ रहे महकमे की दिक्कत दूर करने के लिए वन मुख्यालय ने सीसीएफ कुमाऊं के कार्यालय से पुनर्गठन को लेकर प्रस्ताव मांगा था, जिसके मुताबिक वेस्टर्न सर्किल की पांच डिवीजनों का समायोजन होने पर सिर्फ दो डिवीजन ही बचेगी। दक्षिणी सर्किल की अन्य डिवीजनों को दूसरे में शामिल करने पर बचा नैनीताल वन प्रभाग वेस्टर्न सर्किल का हिस्सा बनेगा। भूमि सरंक्षण रामनगर प्रभाग की तीन रेंज पौड़ी गढ़वाल में शामिल होगी। वहीं, रानीखेत डिवीजन की गैरसैंण रेंज बद्रीनाथ प्रभाग का हिस्सा बनाई जाएगी।

सबसे बड़ी डिवीजन का अस्तित्व खत्म

वेस्टर्न सर्किल को एनटीसीए से बाघ मित्र का अवार्ड मिल चुका है। इसकी तराई पूर्वी डिवीजन को क्षेत्रफल (82489 हेक्टेयर) के लिहाज से सबसे बड़ी डिवीजन कहते हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि तराई पूर्वी को हल्द्वानी डिवीजन में शामिल कर दिया जाएगा, यह दोनों डिवीजन नेपाल बॉर्डर से जुड़ी है।

कुमाऊं की डिवीजनों का नया ढांचा

-सिविल सोयम अल्मोड़ा को अल्मोड़ा फॉरेस्ट डिवीजन में शामिल कर एसडीओ व रेंजर भी समायोजित होंगे।

-भूमि संरक्षण प्रभाग रानीखेत अल्मोड़ा डिवीजन में शामिल होगा।

-भूमि संरक्षण प्रभाग रानीखेत की गैरसैंण रेंज को बद्रीनाथ डिवीजन का हिस्सा बनाया जाएगा।

-भूमि संरक्षण प्रभाग रामनगर की अभियांत्रिक रेंज जो सल्ट में है, उसे अल्मोड़ा डिवीजन में शामिल किया जाएगा।

-भूमि संरक्षण रामनगर डिवीजन की नैनीटांडा, धूमाकोट व ङ्क्षरगलाना रेंज को पौड़ी प्रभाग में मिलाया जाएगा।

-भूमि संरक्षण रामनगर डिवीजन को तराई पश्चिमी डिवीजन से जोड़ा जाएगा।

-भूमि संरक्षण डिवीजन को नैनीताल फॉरेस्ट डिवीजन का हिस्सा बनाने की तैयारी।

-कॉर्बेट से जुड़ी रामनगर डिवीजन को नैनीताल डिवीजन में समायोजित किया जाएगा।

-वेस्टर्न सर्किल की तराई पूर्वी व हल्द्वानी डिवीजन को जोड़कर एक डिवीजन बनेगी।

-वेस्टर्न सर्किल की रामनगर, तराई पश्चिमी व तराई केंद्रीय डिवीजन को मिलाकर एक डिवीजन बनाया जाएगा।

वन क्षेत्राधिकारी संघ उत्तराखंड केे अध्यक्ष गणेश चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि वन विभाग की ओर से तैयार किया गया प्रस्ताव कर्मचारी विरोधी है। प्रमोशन पाकर आइएफएस बनने वाले अधिकारियों को कभी डीएफओ बनने का मौका ही नहीं मिलेगा। ढांचे के पुनर्गठन में सबसे अहम कड़ी बीट होनी चाहिए, मगर उसका कोई जिक्र नहीं है। रेंजर संघ के अलावा अन्य संघों से बात कर आंदोलन किया जाएगा।

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