वरिष्ठ कायचिकित्सा विशेषज्ञ डा. एनके मेहता बता रहे हैं मुधमेह से बचने के उपाय

इलाज के लिए डाक्टर बढ़ गए। लगातार नए अनुसंधान हो रहे हैं। दवाइयों की संख्या भी बढ़ गई। फिर भी डायबिटीज (मधुमेह) कम होने के बजाय बढ़ते ही जा रहा है। वरिष्ठ कायचिकित्सा विशेषज्ञ डा. एनके मेहता बताते हैं ऐसा इसलिए कि लोगों ने आयुर्वेदिक जीवनशैली की अनदेखी कर दी।

Skand ShuklaSun, 28 Nov 2021 03:24 PM (IST)
वरिष्ठ कायचिकित्सा विशेषज्ञ डा. एनके मेहता बता रहे हैं मुधमेह से बचने के उपाय

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : इलाज के लिए डाक्टर बढ़ गए। लगातार नए अनुसंधान हो रहे हैं। दवाइयों की संख्या भी बढ़ गई। फिर भी डायबिटीज (मधुमेह) कम होने के बजाय बढ़ते ही जा रहा है। वरिष्ठ कायचिकित्सा विशेषज्ञ डा. एनके मेहता बताते हैं, ऐसा इसलिए कि लोगों ने आयुर्वेदिक जीवनशैली की अनदेखी कर दी। जबकि आयुर्वेद में मधुमेह होने के कारणों का स्पष्ट तौर पर उल्लेख है। अगर हमें शुगर नियंत्रित रखना है तो आयुर्वेदिक जीवनशैली अपनानी ही होगी। रविवार को चरक क्लीनिक के डा. मेहता दैनिक जागरण के हैलो डाक्टर में थे। उन्होंने कुमाऊं भर के सुधी पाठकों को मधुमेह के कारण, लक्षण, बचाव व आयुर्वेदिक उपचार के बारे में परामर्श दिया।

सवाल- मेरी माताजी को 20 वर्षों से मुधमेह है। एलोपैथिक दवाइयों का सेवन कर रही हैं। क्या आयुर्वेद में इसका इलाज संभव है?

पिथौरागढ़ से सोहन सिंह

डाक्टर - एलोपैथिक दवाइयों के कई तरह के दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं। धीरे-धीरे इन दवाइयों को कम कर आयुर्वेदिक दवाइयां दी जाती हैं। साथ ही मुधमेह से होने वाली अन्य बीमारियों का भी उपचार करना होता है।

सवाल - आयुर्वेदिक दवाइयों का इस्तेमाल हम खुद से भी कर सकते हैं।

अल्मोड़ा से जीवन जोशी

डाक्टर - आयुर्वेदिक दवाइयों का भी इस्तेमाल किसी चिकित्सा विशेषज्ञ के परामर्श पर ही करना चाहिए। विशेषज्ञ आपकी बीमारी की स्थिति को देखते हुए दवाइयां देते हैं।

मधुमेह से बचने को इन बातों का रखें ध्यान

- भरपेट भोजन न करें

- नए अन्न का एकदम प्रयोग न करें

- अधिक समय तक पड़े न रहें

- अधिक गद्देदार बिस्तर पर न सोएं

- नियमित व्यायाम करें

- तनावरहित जिंदगी जिएं

- मांस, मछली का अधिक सेवन न करें

- दूध, दही का अत्यधिक प्रयोग न करें

- कफ पैदा करने वाले आहार न लें

- नित्य स्नान करें

मधुमेह होने का अज्ञात भय

डा. मेहता बताते हैं कि दुनिया का कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है, जो यह दवा कर दे कि उसे मधुमेह नहीं होगा। हर व्यक्ति इस बीमारी के अज्ञात भय से ग्रस्त है। हकीकत यह है कि इस बीमारी के बारे में जितना अधिक जानेंगे, उतना लाभ होगा।

इन्होंने लिया परामर्श

द्वाराहाट से राकेश मठपाल, बिंदुखत्ता से एलएस जग्गी, खटीमा से धमेंद्र, रुद्रपुर से चन्द्रेश, जगदीश, एनजी पाठक, हल्द्वानी से एमएस धानिक, हरीश चंद्र जोशी, श्रीलता तिवारी, एलएम सिंह, बीसी पांडे, रानीखेत से जगदीश चंद्र, अल्मोड़ा से खीमा बिष्ट, शांतिपुरी से हरीश चंद्र जोशी, रामनगर से महेश्वर दत्त, पिथौरागढ़ से शमशेर सिंह आदि ने परामर्श लिया।

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