बिना जेलर के अल्मोड़ा जेल की सुरक्षा, तीन डिप्टी जेलर व 16 बंदी रक्षकों के पद भी खाली

असुरक्षित जेल कुख्यात अपराधियों की पनाहगाह बनती जा रही है। यही कारण है कि जेलों से रंगदारी नशे का कारोबार आसानी से चलाया जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से अल्मोड़ा जेल में न तो जेलर ही है और न ही कोई सीसीटीवी।

Skand ShuklaPublish:Thu, 25 Nov 2021 10:05 AM (IST) Updated:Thu, 25 Nov 2021 10:05 AM (IST)
बिना जेलर के अल्मोड़ा जेल की सुरक्षा, तीन डिप्टी जेलर व 16 बंदी रक्षकों के पद भी खाली
बिना जेलर के अल्मोड़ा जेल की सुरक्षा, तीन डिप्टी जेलर व 16 बंदी रक्षकों के पद भी खाली

चंद्रशेखर द्विवेदी, अल्मोड़ा : असुरक्षित जेल कुख्यात अपराधियों की पनाहगाह बनती जा रही है। यही कारण है कि जेलों से रंगदारी, नशे का कारोबार आसानी से चलाया जा रहा है। सुरक्षा के लिहाज से अल्मोड़ा जेल में न तो जेलर ही है और न ही कोई सीसीटीवी। बैरकों में भी कैदियों और बंदियों को ठूंस कर रखा गया है। इन्हीं अव्यवस्था के बीच बंदी व कैदी सुधरने की बजाय शातिर अपराधी बनकर बाहर निकल रहे हैं।

अल्मोड़ा जेल पिछले कुछ समय से सुर्खियों में है। इस जेल से रंगदारी, हत्या आदि के षडयंत्र रचे जा रहे हैं। जेल के अंदर से नशे का कारोबार जमकर फूल-फल रहा है। एसटीएफ जेल के अंदर पनप रहे नेटवर्क को तोडऩे में लगी है। लेकिन इन हालात के लिए जिम्मेदार जेल प्रबंधन की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। अल्मोड़ा जेल की क्षमता 102 कैदियों को रखने की है लेकिन यहां वर्तमान में 325 बंदी और कैदी रखे गए हैं।

अल्मोड़ा जेल में जेलर का पद ही रिक्त है। जेल में चार डिप्टी जेलर होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही डिप्टी जेलर है। यही हाल बंदी रक्षकों का है। 48 पदों के सापेक्ष केवल 32 बंदी रक्षक हैं और 16 पद रिक्त है। जिससे कई बार जेल के अंदर हालात को नियंत्रित करने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

16 सीसीटीवी की मांग नहीं हुई पूरी

जेल में लंबे समय से सीसीटीवी लगाने की मांग की जा रही है। जेल प्रशासन ने 16 कैमरे की डिमांड की थी। लेकिन अब तक एक भी सीसीटीवी नहीं लगाया गया है।

जैमर लगने से समस्या का होगा समाधान

जेल प्रशासन का कहना है कि अगर जैमर लग जाता है तो कोई भी मोबाइल प्रयोग नहीं कर सकता है। कुख्यात अपराधी इसी का फायदा उठा रहे हैं।

1872 में बनी थी अल्मोड़ा जेल

ऐतिहासिक अल्मोड़ा जेल अंग्रेजों ने 1872 में स्थापित की थी। आजादी से पहले यहां पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को रखा जाता था। अब इस ऐतिहासिक जेल में अपराधी रखे जाते हैं। अल्मोड़ा जेल को हेरिटेज बनाने की मांग की जाती रही हैं। डिप्टी जेलर अल्मोड़ा जेल मेघराज ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर और खाली पदों से संबंधित समस्या उच्चाधिकारियों को भेज दी है। उम्मीद है जल्द ही व्यवस्था चाक चौबंद होगी।