कागजों में चल रही सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना, पानी की कमी व विद्युत बिक्री न हो पाने के कारण बंद है उत्पादन

सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना से एक बार फिर से विद्युत उत्पादन शुरू किया जा चुका है। यह हम नहीं बल्कि उरेडा विभाग का कहना है लेकिन जब दैनिक जागरण ने इसकी हकीकत की पड़ताल की तो जल विद्युत परियोजना सिर्फ कागजों में संचालित होती ही दिखी।

Prashant MishraMon, 19 Jul 2021 04:35 PM (IST)
अब ऊर्जा निगम द्वारा विद्युत मीटर लगाए जाने के बाद जल्द उत्पादन फिर शुरू किया जाएगा।

जागरण संवाददाता, चम्पावत : जनपद मुख्यालय से 15 किमी की दूरी पर स्थित सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना से एक बार फिर से विद्युत उत्पादन शुरू किया जा चुका है। यह हम नहीं बल्कि उरेडा विभाग का कहना है लेकिन जब दैनिक जागरण ने इसकी हकीकत की पड़ताल की तो जल विद्युत परियोजना सिर्फ कागजों में संचालित होती ही दिखी। परियोजना को देख तो लगा ही नहीं कि यहां पर विद्युत उत्पादन शुरू हुआ है। हालांकि उरेडा विभाग का दावा है कि गाजियाबाद की कंपनी ने करीब दो माह पूर्व विद्युत उत्पादन किया लेकिन पानी की कमी व विद्युत बिक्री न हो पाने के कारण उत्पादन बंद कर दिया गया। अब ऊर्जा निगम द्वारा विद्युत मीटर लगाए जाने के बाद जल्द उत्पादन फिर शुरू किया जाएगा।

चम्पावत से करीब 15 किमी दूरी उत्तराखंड जल विद्युत निगम द्वारा 90 के दशक में गौड़ी व सिप्टी घाटी क्षेत्र में क्रमश: 200 व 300 किलोवाट क्षमता के लघु जल विद्युत परियोजना संचालित की गई थी। सिप्टी घाटी में स्थित सप्तेश्वर लघु जल विद्युत परियोजना में उत्पादित 300 किलोवाट बिजली क्षेत्र के कोयाटी, मटेला, चिनाखाल, सैदर्क, जमतोला, नौली, सिमाड़, दिगौली, लफड़ा, गड़कोट, डाबरी, चिल्सों, धामीसौन, नरियालगांव सहित तमाम गांवों को दी जाती थी। लेकिन पानी की कमी के कारण वर्ष 2010 से इस पावर हाउस से बिजली का उत्पादन ठप हो गया था। परियोजना को पुन: संचालित करने के लिए सरकार ने जिम्मेदारी उरेडा विभाग को सौंपी। इसके लिए उरेडा ने गाजियाबाद की एसएस इंजीनियर्स कंपनी से करार की।

कंपनी ने करीब 62 लाख की लागत से परियोजना को फिर से शुरू करने के लिए सुधारीकरण का कार्य कराया और दो माह पूर्व परियोजना के तहत उसमें लगी 150 किलोवाट की दो टरबाइनों से 300 किलोवाट विद्युत उत्पादन शुरू किया। इसकी जानकारी उरेडा विभाग को दी। सप्तेश्वर पावर हाउस से उत्पादित बिजली को उर्जा निगम की ओर से ग्रिड के माध्यम से खरीदी जाएगी।

हालांकि जब दैनिक जागरण की टीम ने इसकी सत्यता जांचने सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना पहुंची तो वास्तविकता इससे काफी दूर थी। वहां पर कोई भी कर्मचारी नहीं तैनात था। गेट पर जंक खाए ताले लटके हुए थे। झाडिय़ां उगी हुई थी। टरबाइनों में जंक लगी हुई थी। विद्युत लाइनों के तार व पोल टूटे हुए थे। ऐसे में विद्युत उत्पादन कैसे शुरू हो गया। जब इसकी जानकारी उरेडा के एई मनोज बजेठा से ली गई तो उन्होंने कहा कि कंपनी ने दो माह पूर्व विद्युत उत्पादन शुरू किया था। उस दौरान सौ से 150 किलोवाट विद्युत उत्पादन भी हुआ लेकिन ऊर्जा निगम द्वारा विद्युत का पेमेंट न देने व पानी की कमी के कारण इसे बंद कर दिया गया है। ऊर्जा निगम द्वारा अपना मीटर लगाने के बाद ही इसे पुन: चालू किया जाएगा।

उर्जा निगम ने मीटर के लिए दिए एक लाख

सप्तेश्वर पावर हाउस में उत्पादित बिजली को ग्रिड के माध्यम से खरीदा जाएगा। उर्जा निगम के एसडीओ विकास भारती ने बताया कि पावर हाउस में उत्पादित हो रही बिजली की खरीद के लिए उर्जा निगम की ओर से नया मीटर लगाया जा रहा है। इसके लिए उरेडा को एक लाख रुपये दिए गए है। जिसकी रीडिंग के आधार पर उरेडा को उत्पादित बिजली का भुगतान किया जाएगा।

गौड़ी पावर हाउस से भी जल्द शुरू होगा बिजली उत्पादन

जिले में सप्तेश्वर जल विद्युत परियोजना के साथ ही जल्द ही गौड़ी पावर हाउस से भी बिजली उत्पादन शुरू हो जाएगा। उरेडा की ओर से 200 किलोवाट क्षमता की गौड़ी पावर हाउस परियोजना के संचालन के लिए एक निजी कंपनी के साथ अनुबंध कर लिया गया है। कंपनी की ओर से पावर हाउस की मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।

सीडीओ जल्द करेंगे पावर हाउस का निरीक्षण

उरेडा विभाग के दोहरे बयान को देखते हुए सीडीओ आरएस रावत जल्द सप्तेश्वर पावर हाउस की वास्तुस्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने बताया कि जल्द ही कार्यदायी कंपनी, उरेडा व विद्युत विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों के साथ उसका निरीक्षण करेंगे। जिससे परियोजना को पुन: जल्द संचालित किया जा सके। जिसका लाभ लोगों को मिल सके।

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