पुनर्जीवित होने वाली नदियों से बढ़ेगा भूजलस्तर, ग्रामीण क्षेत्रों की ही नदियां योजना में शामिल

जिले में नमामि गंगे परियोजना के तहत भी कई नालों को चिह्नित किया गया और उनमें बहने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए नालों की टैङ्क्षपग की गई है। नदियां पुनर्जीवित होंगी तो तराई में भूजल स्तर बढ़ सकता है जिससे भविष्य में जल संकट उत्पन्न नहीं होगा।

Prashant MishraWed, 22 Sep 2021 11:27 PM (IST)
डीडीओ डा. महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि इन नदियों की सफाई कर किनारों पर पौधारोपण किया जाएगा।

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : बारिश का पानी रिचार्ज हो सके। इसके लिए विलुप्त होती जा रहीं जिले की नौ नदियों को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए मनरेगा से बजट मिलेगा। कई ब्लॉकों में काम शुरू भी हो चुका है। जिले में नमामि गंगे परियोजना के तहत भी कई नालों को चिह्नित किया गया और उनमें बहने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए नालों की टैङ्क्षपग की गई है। नदियां पुनर्जीवित होंगी तो तराई में भूजल स्तर बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में जल संकट उत्पन्न नहीं होगा। 

सिडकुल की वजह से भूजल स्तर का काफी दोहन किया जा रहा है। खासकर पेपर मिलों में। पिछले कुछ वर्षों से जिले की आबादी में तेजी से इजाफा हुआ है। इससे 10 साल में करीब चार से पांच मीटर भूजल स्तर नीचे खिसक गया है। जिले में रुद्रपुर की मदनी, काशीपुरकी ढेला और पथरी, जसपुर ब्लॉक में लपकना और मतवाली, बाजपुर ब्लॉक में गाडरी, खटीमा में थानारा और गदरपुर ब्लॉक में निहाल और बौर नदी का पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया जा रहा है। डीडीओ डा. महेश कुमार गुप्ता ने बताया कि इन नदियों की सफाई कर किनारों पर पौधारोपण किया जाएगा।

करीब एक करोड़ रुपये से अधिक का बजट मनरेगा से ब्लॉक स्तर पर खर्च होंगे। नदियों को जिले में ङ्क्षचहित कर बारिश के जल को रिचार्ज करने में सहायता मिलेगी। यह नदियां वर्षों से अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। इसे लेकर जल संरक्षण से जुड़े शोध विशेषज्ञों की कार्यशाला का भी आयोजन बीते कुछ माह पहले किया जा चुका है। जिसमेंं अल्मोड़ा से प्रोफेसर जीएस रावत ने जल संरक्षण को लेकर अपनी कार्ययोजना के तहत काम किए जाने की रणनीति अधिकारियों को बताई थी। उसके तहत भी मनरेगा से कार्य किया जा रहा है। 

डीडीओ डा. महेश कुमार गुप्त ने बताया कि बारिश के पानी को रिचार्ज किया जा सके इसके लिए नौ नदियों को पुर्नजीवित किया जा रहा है। यह एक बड़ा अभियान है। मनरेगा मद से सभी ब्लाकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कई जगह पर कार्य भी शुरू किया जा चुका है। ताकि बारिश के इस सीजन में अभियान की प्रगति रिपोर्ट देखी जा सके।

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