बागेश्वर में हत्या मामले में दस वर्ष की सजा व दस हजार रुपये का अर्थदंड

अभियुक्त ठाड़ाइजर रीमा निवासी अनिल कुमार पुत्र शंकर राम ने घटना का अंजाम दिया। उसी गांव के निवासी स्व. राजेंद्र प्रसाद को उसी के घर की दीवार पर धक्का देकर मार दिया था। सिर पर चोट आने से उसने मौके पर दम तोड़ दिया था।

Prashant MishraFri, 26 Nov 2021 08:43 PM (IST)
मृतक की पत्नी ने घटना की रिपोर्ट रीमा चौकी में दर्ज की थी।

जागरण संवाददाता, बागेश्वर : अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा की अदालत ने हत्या के मामले में अभियुक्त को दस वर्ष की कठोर करावास की सजा सुनाई है। उसे दस हजार रुपये अर्थदंड से भी दंडित किया है। घटना तीस अप्रैल 2021 के दिन की है। अभियुक्त ठाड़ाइजर, रीमा निवासी अनिल कुमार पुत्र शंकर राम ने घटना का अंजाम दिया। उसी गांव के निवासी स्व. राजेंद्र प्रसाद को उसी के घर की दीवार पर धक्का देकर मार दिया था। सिर पर चोट आने से उसने मौके पर दम तोड़ दिया था। इस घटना को मृतक की पत्नी कमला देवी ने स्वयं अपने आंखों से अपने घर के छत से देखा था। मृतक की पत्नी ने घटना की रिपोर्ट रीमा चौकी में दर्ज की थी। मामले में अपर सत्र न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष, मृतक की पत्नी समेत सात गवाह के बयान एवं पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर आरोपित को धारा 304 आइपीस में दंडित किया। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता जीबी उपाध्याय, सहायक जिला शासकी अधिवक्ता चंचल सिंह पपोला ने की।

चरस आरोपित को दस वर्ष की कठोर सजा

बागेश्वर : विशेष सत्र न्यायाधीश शंहशाह मोहम्मद दिलावर दानिश ने चरस तस्करी के मामले में एक आरोपित कपकोट तहसील के किमू गांव निवासी लछम सिंह पुत्र नैन सिंह को दस वर्ष का कठोर करावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। 

घटना तीस दिसंबर 2019 की है। कोतवाली पुलिस शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आरे-द्यांगण बाइपास पर आने-जाने वाले वाहनों की चेकिंग कर रही थी। तभी लगभग 4.25 बजे लछम सिंह कपकोट की ओर से पैदल अपने कंधे पर काले रंग का बैग लटकाकर आ रहा था। जिससे पुलिस ने पूछताछ की। वह घबरा गया और बैग में चरस होना और बेचने के लिए हल्द्वानी जाने की बात करने लगा। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया और राजपत्रित अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक के समक्ष चरस को तोला गया। उसका वजन दो किलो 225 ग्राम निकला। एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज किया। पुलिस ने मौके पर बरामदगी कार्रवाई की और आरोपित के विरोध आरोपत्र अदालत में पेश किया।

विशेष सत्र न्यायालय में मामले का विचारण प्रारंभ हुआ। अभियोजन ने 12 गवाह अदालत में परीक्षित कराए। अदालत ने गवाहों के बयानों और पत्रावली मे उपलबध साक्ष्य के आधार पर आरोपित को दोषी पाया और सजा सुनाई। मामले की पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता गोविंद बल्लभ उपाध्याय और सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजीदारी चंचल सिंह पपोला ने की। जबकि आरोपित ने अपने बचाव में दो गवाह अदालत में प्रस्तुत किए।

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