फॉरेंसिक, फायर, आइटीबीपी सहित कई एजेंसियां ने की जांच, नहीं पता चला ब्‍लास्‍ट का कारण

भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के घर देर रात हुए ब्लास्ट की तह तक पुलिस 24 घंटे बाद भी नहीं पहुंच सकी है। विस्फोट का पता लगाने के लिए फायर फॉरेंसिक आइटीबीपी सहित कई एजेंसियां जांच में लगी रही। जांच टीमों ने घर का कोना-कोना छाना मगर कुछ हासिल नहीं हुआ।

Skand ShuklaThu, 16 Sep 2021 07:52 AM (IST)
फॉरेंसिक, फायर, आइटीबीपी सहित कई एजेंसियां ने की जांच, नहीं पता चला ब्‍लास्‍ट का कारण

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप बिष्ट के घर देर रात हुए ब्लास्ट की तह तक पुलिस 24 घंटे बाद भी नहीं पहुंच सकी है। विस्फोट का पता लगाने के लिए फायर, फॉरेंसिक, आइटीबीपी सहित कई एजेंसियां जांच में लगी रही। जांच टीमों ने घर का कोना-कोना छाना, मगर कुछ हासिल नहीं हुआ। डीआइजी कुमाऊं नीलेश आनंद भरणे भी शाम तक मौके पर डटे रहे।

भाजपा जिलाध्यक्ष के हीरानगर स्थित आवास में मंगलवार की रात करीब पौने 12 बजे जोरदार धमाका हुआ था। विस्फोट से घर के दरवाजे, खिड़कियां समेत अन्य सामान क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना में बिष्ट व उनका परिवार बाल-बाल बचा। रात को ही डीएम धीराज गब्र्याल समेत पूरी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन ब्लास्ट के कारणों का पता नहीं लगाया जा सका था।

बुधवार की सुबह से डीआइजी नीलेश आनंद भरणे पूरी टीम के साथ जांच में जुटे रहे। शाम तक आइटीबीपी के एएसआइ पंकज, बम डिस्पोजल दस्ता व डॉग स्क्वायड ऊधमसिंह नगर के प्रमुख विजय शंकर यादव, फारेंसिक टीम, इंडेन गैस बॉटलिंग प्लांट अधिकारी, अग्नि सुरक्षा अधिकारी, एसी, फ्रिज मैकेनिक आदि ने घटनास्थल का जायजा लिया। हर एंगल से जांच की। इसके बावजूद किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा जा सका।

यहां तक कि डीआइजी समेत फॉरेसिंक टीम एलपीजी रिसाव को घटना का कारण भी बताने लगे। जबकि सिलेंडर में केवल तीन किलो ही गैस कम थी। घटना के बाद देखा गया तो सिलेंडर लीक नहीं हो रहा था। जबकि पुलिस ने एक दिन पहले घटना को आकाशीय बिजली से जोड़ दिया था। जांच में यह कारण भी सामने नहीं आया। जिलाध्यक्ष की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

कहीं शहर का मिजाज बिगाडऩे की कोशिश तो नहीं

भाजपा जिलाध्यक्ष के घर पर धमाका कहीं शहर के मिजाज को बिगाडऩे की कोशिश तो नहीं थी। कुछ इस तरह की चर्चा भी आम जुबान पर थी। यह भी सवाल उठ रहे थे कि कहीं यह घटना असामाजिक तत्वों की शरारत तो नहीं। ऐसा इसलिए भी कि चार महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। तीन दिन पहले कुमाऊं में एक माओवादी को पुलिस ने पकड़ा है।

 

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