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प्रो एनएस सिंह बने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के पहले कुलपति

प्रो एनएस सिंह बने सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा के पहले कुलपति
Publish Date:Tue, 11 Aug 2020 02:49 PM (IST) Author: Skand Shukla

अल्मोड़ा, जेएनएन : इसी साल अस्तित्व में आए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को अपना पहला कुलपति मिल गया है। विवि के पहले वीसी का चुनाव राज्य सरकार ने किया है। सरकार की ओर से गठित तीन सदस्यीट कमेटी ने प्रो नरेन्द्र सिंह भंडारी के नाम की संस्तुति भेजी थी। जिसे सरकार ने अनुमति देते हुए शासनादेश जारी कर दिया। कुलपति का चयन तीन वर्ष के लिए हुआ है।

अल्मोड़ा विवि के पहले कुलपति प्रो एनएस भंडारी रसायन विज्ञान विभाग के प्राध्यापक हैं। वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के स्वयंसेवक भी रहे हैं। वह अल्मोड़ा विद्यार्थी परिषद नगर अध्यक्ष से लेकर भाजपा प्रबुद्ध प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक रहे हैं। मूल रूप से नैनी सैनी पिथौरागढ़ निवासी प्रो भंडारी की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई व पिथौरागढ़ में हुई है। मिशन इंटर कॉलेज पिथौरागढ़ से इंटर पास किया। जबकि 1983 में पिथौरागढ़ डिग्री कॉलेज से ही स्नातक व स्नातकोत्तर किया। आईआईटी दिल्ली से पीएचडी प्रो भंडारी शोध के दौरान ही 1988 में कुमाऊं विवि में नियुक्त हो गए। उनके 42 शोध पत्र , पांच किताब प्रकाशित हो चुकी हैं। जबकि उनके अधीन आठ शोधार्थी पीएचडी कर चुके हैं, चार कर रहे हैं। वे राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस भी शामिल रहे।

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय, अल्मोड़ा आवासीय सह संबद्ध विश्वविद्यालय होगा। विश्वविद्यालय अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, बागेश्वर और चंपावत जिलों में राज्य के सभी स्नातकोत्तर और डिग्री कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करेगा। प्रदेश की भाजपा सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार में वर्ष 2016 में स्थापित उत्तराखंड आवासीय विश्वविद्यालय अल्मोड़ा को नया स्वरूप देते हुए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय बनाया है। यह अपने आवासीय परिसर में विशेष कार्यक्रम व सुविधाएं भी प्रदान करेगा। पंडित बद्री दत्त पांडे पीजी कॉलेज बागेश्वर, लक्ष्मण सिंह महार पीजी कॉलेज पिथौरागढ़ और सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा सहित इस विश्वविद्यालय के तीन परिसर होंगे। मौजूदा आवासीय विश्वविद्यालय परिसर का इसमें पूर्ण विलय किया जाएगा।

 

सरकार घटा-बढ़ा सकेगी कार्यक्षेत्र

नए विश्वविद्यालय में अनुसंधान, विकास से संबंधित पारंपरिक, कौशल विकास, पेशेवर रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम व कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय अधिनियम में ये प्रवधान किया गया है कि राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना के जरिये विश्वविद्यालय का कार्य क्षेत्र या शैक्षणिक अधिकारिता को घटा या बढ़ा सकेगी। राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व विश्वविद्यालय के प्रधान व सभा के सभापति होंगे। कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति करेंगे। विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति की नियुक्ति राज्य सरकार ने की है। कुलपति का कार्यकाल तीन वर्ष के लिए होगा। कुलपति के चयन को तीन सदस्यीय सर्च कमेटी गठित बनाई गई थी। इसमें कुलाधिपति की ओर से एक, यूजीसी की ओर से एक और राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को नामित किया गया था। सचिव समिति के संयोजक बनाए गए थे।

 

अधिनियम में कार्यों व दायित्वों का उल्लेख

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अधिनियम-2019 में कुलपति, कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के कार्यो व दायित्वों का उल्लेख किया गया है। कुलपति को कार्य परिषद, सभा, शैक्षिक परिषद व वित्त समिति के अधिवेशन को बुलाने की शक्ति होगी। वह कार्य परिषद, शैक्षिक परिषद और वित्त समिति का पदेन अध्यक्ष होगा। कुलसचिवों, उप कुलसचिवों और सहायक कुलसचिवों की नियुक्ति केंद्रीयकृत सेवा नियमावली के माध्यम से होगी। परीक्षा नियंत्रक विश्वविद्यालय का पूर्णकालिक अधिकारी होगा, जो एसोसिएट प्रोफेसर से निम्न स्तर का नहीं होना चाहिए।

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