रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय कैंपस के लिए प्रक्रिया हुई तेज, जानिए क्या है अपडेट

रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय कैंपस के लिए प्रक्रिया हुई तेज, जानिए क्या है अपडेट

रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय का कैंपस बनाए जाने को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि रामगढ़ में विश्वभारतीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए वह प्रयासरत हैं।

Skand ShuklaTue, 20 Apr 2021 09:47 AM (IST)

हल्द्वानी, जागरण संवाददाता : रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय का कैंपस बनाए जाने को लेकर प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार ने भारत सरकार को पत्र लिखा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि रामगढ़ में विश्वभारतीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए वह प्रयासरत हैं। सोमवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों से वार्ता के दौरान डा. निशंक ने कहा कि शांतिनिकेतन कोलकाता स्थित विश्वभारती विश्वविद्यालय के कैंपस के लिए प्रस्ताव बनाया है।

 

अब भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए राज्य सरकार को करना है। इसके लिए उन्होंने उच्च शिक्षा राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डा. धन सिंह रावत की ओर इशारा किया। इस पर डा. रावत ने कहा कि वह खुद भी रामगढ़ टैगोर टॉप जा चुके हैं। उन्होंने भूमि देखी है। यह भूमि उद्यान विभाग है। उन्होंने इसके लिए भारत सरकार को पत्र भी भेजा है, ताकि पूरे प्रस्ताव के साथ भूमि प्रक्रिया शुरू की जा सके। साथ ही डीएम नैनीताल को भी भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर निर्देशित भी किया है।

 

एशिया में साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले प्रथम व्यक्ति रबींद्रनाथ टैगोर ने रामगढ़ के टैगोर टॉप क्षेत्र में विश्वप्रसिद्ध कृति गीतांजलि की रचना की थी। उनका सपना भी था कि इस विश्वविद्यालय को रामगढ़ में खोला जाए, लेकिन अब उनकी सरकार ने रामगढ़ में विश्वभारती विश्वविद्यालय के परिसर को स्वीकृति दे दी है। केंद्रीय विश्वविद्यालय के इस परिसर से कुमाऊं भर के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यह परिसर क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा आधार होगा। इससे कुमाऊं क्षेत्र में लाभ मिलेगा। रोजगार के साथ ही पर्यटन की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। इसके लिए वह सांसद अजय भट्ट का भी आभार जताने चाहते हैं।

 

टैगोर ने अंग्रेज मित्र से खरीदी थी भूमि

रामगढ़ में टैगोर ने अपने अंग्रेज मित्र डेरियाज से 40 एकड़ की भूमि खरीदी थी। वह कई बार वहां पहुंचे और 1901 में गीतांजलि के कुछ अंश लिखे। इस जगह को उन्होंने हिमंती गार्डन नाम दिया था।

 

 

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