घर और ऑफिस में ज्‍यादा समय गुजारने वालों में एलर्जी की समस्या कहीं अधिक

लोगों का सोचना रहता है कि अगर वह घर पर ही हैं या फिर कार्यालय में ही तो एलर्जी नहीं होगी। यह सोचना गलत है। घर के अंदर की डस्ट ही एलर्जी का बड़ा कारण है। इसका सबसे पहले और ज्यादा असर नाक पर ही पड़ता है।

Skand ShuklaSun, 26 Sep 2021 02:03 PM (IST)
घर और ऑफिस में ज्‍यादा समय गुजारने वालों में एलर्जी की समस्या कहीं अधिक

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : लोगों का सोचना रहता है कि अगर वह घर पर ही हैं, या फिर कार्यालय में ही तो एलर्जी नहीं होगी। यह सोचना गलत है। तमाम अध्ययनों से यह स्पष्ट हो गया है कि घर के अंदर की डस्ट ही एलर्जी का बड़ा कारण है। इसका सबसे पहले और ज्यादा असर नाक पर ही पड़ता है। गर्व डायग्नोस्टिक व हॉस्पिटल के वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डा. वैभव कुच्छल बताते हैं, घर के अंदर ही रहने से इम्यूनिटी भी कम हो जाती है। ऐसे में एलर्जी से बचाव के लिए जीवनशैली में ही बदलाव जरूरी है। लक्षण महसूस होते ही इलाज कराना बेहतर है। डा. कुच्छल रविवार को दैनिक जागरण के हैलो डाक्टर आयोजन में उपस्थित थे। उन्होंने कुमाऊं भर के लोगों को फोन से परामर्श दिया।

नाक की एलर्जी का कारण

- धूल, धुएं में रहना - ठंडे पदार्थों का अधिक सेवन - सीलन वाली जगह रहना - व्यायाम न करना - घर में जानवरों के रोवें - परदे, सोफे आदि की धूल - तकिये की गंदगी

ये हैं लक्षण

नाम से पानी आना - छींकें आना - सिर में दर्द होना - आंख में पानी आना - कान में खुजली, भारीपन - खले में खरास - काफी देर होने पर दमा

सायनस भी एलर्जी का ही रूप

डा. कुच्छल ने बताया कि जब एलर्जी बढ़ जाती है तो यह सायनस का रूप ले लेती है। सामान्य तौर पर साइनस का इलाज दवाइयों से ही संभव है। नेजल स्प्रे आदि के उपयोग की सलाह दी जाती है। बहुत अधिक जरूरत पडऩे पर दूरबीन से भी ऑपरेशन किया जाता है।

बचाव के अपनाएं ये तरीका

- नियमित व्यायाम करें - एलर्जी वाली चीजों से बचें - घर में साफ-सफाई पर ध्यान दें - लक्षण दिखते ही इलाज कराएं

अब कम उम्र में ही कान में आवास की समस्या

हैलो डाक्टर में कई लोगों ने कान में आवाज आने की समस्या को लेकर भी सवाल किए। इसमें बुजुर्ग के साथ ही युवा भी शामिल थे। डा. कुच्छल ने परामर्श दिया कि अधिक उम्र का असर कान में आवाज (टिनाइटस) की रहती है। इसका कारण मोबाइल का अधिक प्रयोग, ईयर फोन, तेज संगीत, नशीले पदार्थों का सेवन के अलावा फैक्ट्री में काम करना है। कोशिश रहे कि बचाव पर भी ध्यान दिया जाए।

इन्होंने लिया परामर्श

हल्द्वानी से शाकिर हुसैन, रमेश चंद्र, पुष्पा भसीन, मोहन चंद्र पांडे, सतीश, ऊंचापुल से तुलसी पंत, भीमताल से हेमा पांडे, सितारगंज से एसएस श्रीवास्तव, पूरन सिंह राणा, पंतनगर से मुक्तिनाथ, स्वप्न लाल, रामनगर से अरुषि, रानीखेत से लीला तिवारी, अल्मोड़ा से विमलेश, लीला बिष्ट, राम सिंह, आशा बोरा, लोहाघाट से चंद्रशेखर, सुयालबाड़ी से मदन मोहन सुयाल, पिथौरागढ़ से प्रकाश चंदानी, रमेश सिंह बिष्ट, प्रकाश, खटीमा से कृष्ण कुमार, नैनीताल से राजेंद्र जोशी, जगदीश, गदरपुर निरंजन कुमार आदि ने फोन कर परामर्श लिया।

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