गौला के सर्वे संग खनन की तैयारियां तेज, वन विभाग की टीम सीमांकन व अन्य काम में जुटी

अक्टूबर को खनन सत्र माना जाता है। ऐसे में वन विभाग भी गौला में खनन करवाने की तैयारियों में जुट गया। रेंज स्तर से वहां सीमांकन व अन्य काम शुरू कर दिए जाएंगे। फिलहाल नदी में पानी भी है। मगर फॉरेस्ट अपनी तरफ से देरी नहीं करना चाहता।

Skand ShuklaFri, 17 Sep 2021 01:17 PM (IST)
गौला के सर्वे संग खनन की तैयारियां तेज, वन विभाग की टीम सीमांकन व अन्य काम में जुटी

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी: अक्टूबर को खनन सत्र माना जाता है। ऐसे में वन विभाग भी गौला में खनन करवाने की तैयारियों में जुट गया। रेंज स्तर से वहां सीमांकन व अन्य काम शुरू कर दिए जाएंगे। फिलहाल नदी में पानी भी है। मगर फॉरेस्ट अपनी तरफ से देरी नहीं करना चाहता। इसके बाद वन निगम द्वारा तौलकांटों व गेटों पर मौजूद अस्थायी कक्षों को व्यवस्थित किया जाएगा। जिला प्रशासन कोशिश में जुटा है कि इस बार खनन सत्र समय से शुरू हो जाए। ताकि रोजगार का मौका मिले।

उत्तराखंड में गौला को सर्वाधिक राजस्व देने वाली नदी कहा जाता है। पूर्व में वन निगम ने दो अरब तक का राजस्व हासिल किया था। लेकिन पिछले कुछ सालों में बारिश कम होने के कारण उपखनिज निकासी का लक्ष्य कुछ काम हुआ। हालांकि, इस बार बारिश ठीक होने खासकर पहाड़ी इलाकों में के कारण वन विभाग व वन निगम दोनों को उम्मीद है कि निकासी का लक्ष्य भी बढ़ेगा। तराई पूर्वी डिवीजन के रेंजर आरपी जोशी ने बताया कि खनन शुरू कराने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। सीमांकन का काम पूरा होने के कारण कच्चे मार्ग को ठीक करने व बाहर खोदी गई खाई को भी पाटा जाएगा। फिलहाल गश्त को लेकर भी अलग-अलग टीम बनाई गई है। ताकि तस्करों की सक्रियता को रोका जाए।

रोजगार और बाजार को मजबूती

शीशमहल से लेकर शांतिपुरी तक गौला के 13 निकासी गेटों पर 7500 वाहन चलते हैं। इसके अलावा बुग्गी गेट अलग से हैं। हल्द्वानी समेत तराई के एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर गौला से रोजगार मिलता है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.