लोगों के साथ ही साहित्य की सेहत सुधारने में जुटे हैं फार्मासिस्ट कुमुद

पेशे से फार्मासिस्ट पंत हिंदी साहित्य को सबल बनाने का काम कर रहे हैं। पीएचसी चकरपुर में फार्मासिस्ट डा. जगदीश पंत कुमुद का साहित्यिक सफर रोचक रहा है। निरंतर अध्ययन और लेखन की प्रवृत्ति के चलते डिप्लोमा इन फार्मेसी करने के पश्चात भी अध्ययन जारी रखा।

Prashant MishraTue, 14 Sep 2021 05:28 PM (IST)
बुक्सा बोली को उत्तराखंड की भाषाओं के शब्दकोष में भी स्थान दिलाने का कार्य किया।

राजेंद्र सिंह मिताड़ी, खटीमा। हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति विशेष अनुराग रखने वाले डा.जगदीश पंत 'कुमुद' स्वास्थ्य सेवा के साथ हिंदी साहित्य की सेवा का अनुपम उदाहरण पेश कर रहे हैं। देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में अपनी रचनाओं से स्थान बना चुके डा. पंत की अब तक तीन पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जबकि दो प्रकाशनाधीन हैं।

पेशे से फार्मासिस्ट पंत हिंदी साहित्य को सबल बनाने का काम कर रहे हैं। पीएचसी चकरपुर में फार्मासिस्ट डा. जगदीश पंत 'कुमुद' का साहित्यिक सफर रोचक रहा है। निरंतर अध्ययन और लेखन की प्रवृत्ति के चलते डिप्लोमा इन फार्मेसी करने के पश्चात भी अध्ययन जारी रखा। कुमाऊं विवि नैनीताल से व्यक्तिगत छात्र के रूप में  बीए और फिर अर्थशास्त्र व हिंदी से एमए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने हिंदी में पीएचडी कुमाऊं विवि नैनीताल में प्रवेश लिया और 'ऊधमसिंह नगर जिले के भाषा वैज्ञानिक अध्ययन' विषय पर प्रो. चंद्रकला रावत के निर्देशन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। डा. पंत ने इसके बाद भारतीय भाषा लोक सर्वेक्षण के तहत उत्तराखंड की भाषाओं में बुक्सा पर कार्य किया जो पुस्तक के रूप में उपलब्ध है। उन्होंने बुक्सा बोली को उत्तराखंड की भाषाओं के शब्दकोष में भी स्थान दिलाने का कार्य किया।

उत्तराखंड मुक्त विवि पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त कुमुद के कई लेख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए। इसके साथ ही हंस, साहित्य अमृत, राष्ट्रधर्म, मधुमती, हरिगंधा, साहित्य गुंजन, युगवाणी आदि प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में इनकी कहानियों, लघुकथाओं और कविताओं को स्थान मिला है। बाल कविताओं की इनकी पुस्तक 'बंदर की बरात' बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा से पुरस्कृत हो चुकी है तथा लघु कथा संग्रह 'आखेटक' को भोपाल का प्रतिष्ठित शब्द गुंजन सम्मान मिला है। विभिन्न कवि सम्मेलनों में भागीदारी कर चुके कुमुद का कविता संग्रह 'अब मौन ठीक नहीं' को पाठकों से काफी सराहना मिली।

कुमुद बताते हैं कि उनका एक कविता संग्रह और कहानी संग्रह प्रकाशनाधीन है। देश की विभिन्न भाषाओं पर कार्य कर रही संस्था 'सोसाइटी फार इंडेंजर्ड एंड लेसर नोन लैंग्वेज'(सेल) ने कुमाऊंनी भाषा के सर्वेक्षण हेतु डा. पंत को जनपद ऊधमङ्क्षसह नगर का कोआॢडनेटर मनोनीत किया है। हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं के रचनाकार डा. पंत का मानना है उत्तराखंड में हिंदी साहित्य के प्रचार प्रसार के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। उत्तराखंड साहित्य अकादमी और भाषा संस्थान के सफल क्रियान्वयन का कार्य इस दिशा में अच्छा प्रयास हो सकता है।

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