दलहन में देश को आत्मनिर्भर बनाएगा पंत विश्वविद्यालय, नई प्रजातियों का हुआ नोटिफिकेशन

सभी प्रजातियां पहाड़ के लिए मुफीद होंगी। इससे पहाड़ में दलहन का उत्पादन बढ़ेगा जो लोगों की सेहत के साथ आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कृषि विज्ञानियों के मुताबिक अभी तक दलहन की जो प्रजातियां विकसित हुई थीं वह मैदान के लिए कारगार हुई थी।

Prashant MishraWed, 21 Jul 2021 06:50 AM (IST)
नई प्रजातियों की खासियत यह है कि सामान्य प्रजातियों से 10 से 20 फीसद अधिक उत्पादन होगा।

अरव‍िंद कुमार स‍िंह, पंतनगर। जीबी पंत विश्वविद्यालय अब उत्तराखंड के साथ देश को भी दलहन में आत्मनिर्भर बनाएगा। विवि ने मटर की नई प्रजाति पंत पी347, 195, उड़द की पंत 11, अरहर की पंत 7 व चना की पंत-7 प्रजाति विकसित की है। इन्हें पिछले साल भारत सरकार व राज्य सरकार ने रिलीज कर दिया था। इन सभी प्रजातियों का कृषि मंत्रालय ने इस साल नोटिफिकेशन कर दिया है। विवि इस साल 10 हजार ङ्क्षक्वटल बीज का उत्पादन करेगा। जिसे किसानों को बेचा जाएगा। इनकी खासियत, सामान्य प्रजातियों से 10 से 20 फीसद अधिक उत्पादन क्षमता है। 

हरित क्रांति के श्रेय पाने वाले पंत विवि के कृषि विज्ञानी उत्तराखंड में कृषि विकास में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। विज्ञानियों ने कई साल के शोध के बाद दलहन की उन्नतशील प्रजातियां विकसित की हैं, जिन्हें इस साल कृषि मंत्रालय से नोटिफिकेशन कर दिया गया है। इसकी विवि अब बीज तैयार करेगा। अभी तक विवि में सात हजार ङ्क्षक्वटल दलहन बीज का उत्पादन होता था, अब नई प्रजातियों के आने से उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10 हजार ङ्क्षक्वटल कर दिया गया है।

खास बात यह है कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के हिसाब से ही पंत मटर -347 व पंत मटर-195, पंत मसूर-11,पीएल 164, पंत अरहर-7, पीए 477, पंत चना-7पीजी 172 की नई प्रजातियां विकसित की है। ये सभी प्रजातियां पहाड़ के लिए मुफीद होंगी। इससे पहाड़ में दलहन का उत्पादन बढ़ेगा, जो लोगों की सेहत के साथ आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। कृषि विज्ञानियों के मुताबिक अभी तक दलहन की जो प्रजातियां विकसित हुई थीं, वह मैदान के लिए कारगार हुई थी। पंत विवि के शोध निदेशक डा.अजीत ङ्क्षसह नैन ने बताया कि नई प्रजातियों का भी बीज उत्पादन किया जाएगा। जिसे किसानों को बेचा जाएगा।

तीन मिलियन एमटी दलहन का होता आयात

देश में 39 मिलियन मिट्रिक टन दलहन की मांग की है, जबकि उत्पादन 23.22 मिलियन मिट्रिक टन होता है। लोगों की थालियों में प्रोटीनयुक्त दाल उपलब्ध हो सके,इ सके लिए केंद्र सरकार विदेशों से तीन मिलियन मिट्रिक टन दलहन का आयात करती है। कृषि विज्ञानियों के मुताबिक उन्नत प्रजातियों का बीज तैयार होगा तो उत्पादन भी अधिक होगा। इससे दलहन के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम पड़ेगा।

किन क्षेत्रों में उगाई जा सकती है दलहन की फसल

1- मटर: मटर पंत -347

पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर पश्चिम एवं

मध्य राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश,

उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्र व जम्मू एवं कश्मीर

2-पंत मटर-195 उत्तराखंड

3- मसूर: पंत मसूर-11

(पीएल 164)

उत्तराखंड

4- अरहर: पंतअरहर-7

(पीए 477)

उत्तराखंड

5- चना: पंत चना-7

(पीजी 172)

उत्तराखंड

संयुक्त निदेशक, बीज उत्पादन केंद्र, पंत विवि डा.प्रभा शंकर शुक्ला ने बताया कि पिछले साल दलहन की नई प्रजातियों को रिलीज किया गया था। इस साल कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने नोटिफिकेशन कर दिया है। अब इन प्रजातियों का बीज उत्पादन किया जाएगा। नई प्रजातियों की खासियत यह है कि सामान्य प्रजातियों से 10 से 20 फीसद अधिक उत्पादन होगा। यहीं नहीं, कुछ प्रजातियां पहाड़ के लिए विकसित की गई है।

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