शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद की वाणी निकल रही पहाड़ की पीड़ा

गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद उत्तराखंड प्रवास पर हैं। वह धर्म राजनीति प्रशासन शिक्षा संस्कार एवं पलायन पर बेबाकी से संवाद कर संदेश दे रहे हैं। पर्वतीय जिलों की बड़ी समस्या पलायन पर शंकराचार्य ने जो टिप्पणी की है वह हमारे नेताओं को आईना दिखाने वाली है।

Skand ShuklaTue, 30 Nov 2021 08:20 AM (IST)
शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद की वाणी निकल रही पहाड़ की पीड़ा

जागरण संवाददाता, हल्‍द्वानी : गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद इन दिनों उत्तराखंड प्रवास पर हैं। वह धर्म, राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, संस्कार एवं पलायन पर बेबाकी से संवाद कर संदेश दे रहे हैं। पर्वतीय जिलों की बड़ी समस्या पलायन पर शंकराचार्य ने जो टिप्पणी की है वह हमारे नेताओं को आईना दिखाने वाली है। स्मार्ट सिटी व स्प्रिचुअल सिटी जैसे शब्दों को वह नेताओं की चाल कह रहे हैं। कहते हैं कि इन शब्दों के जरिये नेता लोगों को ललचा रहे हैं। शहरों में शुद्ध हवा, पानी और शुद्ध मनोभाव का अभाव है। हर लिहाज से पलायन के जिम्मेदार यही नेता हैं। शंकराचार्य की वाणी को पहाड़ की पीड़ा को समझा जा सकता है। ऐसा न होता तो जो सुविधाएं शहरों में मिल रही हैं वह आज भी गांवों से दूर क्यों हैं। सरकारें आती व जाती रहती हैं मगर पहाड़ की यह पीड़ा बढ़ती ही जा रही है।

इधर धाकड़ धामी उधर हरदा कप्तान

चुनावी साल में जिस तेजी से धाकड़ धामी बल्लेबाजी कर रहे हैं उससे युवा सीएम के जज्बे की झलक भी मिल रही है। सीएम पुष्कर सिंह धामी की पीठ पीएम, राष्ट्रीय अध्यक्ष व रक्षा मंत्री भी थपथपा गए हैं। इसलिए भी वह 2022 के मैच के पूर्वाभ्यास में खूब पसीना बहा रहे हैं। दूसरे छोर से कांग्रेस के अनुभवी नेता व पूर्व सीएम हरीश रावत लगातार गुगली फेंक रहे हैं। हरदा की तूफानी बल्लेबाजी भी उनके लगातार दौरों से झलक रही है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से भी वह खूब चुनावी गेंद उछाल रहे हैं। यहां तक कि पार्टी से आउट हुए धुरंधरों को भी वह मैदान में ला रहे हैं। मगर कप्तान हरदा खुद मैदान में उतरने से बच भी रहे हैं। दरअसल पिछली बार दो-दो सीटों से मिली हार की चोट उन्हें अब भी परेशान कर रही है। कुल मिलाकर जनता के लिए मैच रोचक होने वाला है।

डरना नहीं, अधिक सतर्क रहना है

कोरोना अब एक और रूप में सामने आया है। नए वेरिएंट ओमिक्रोन के केस हालांकि अभी भारत में नहीं मिले हैं, लेकिन सतर्कता बढ़ गई है। उत्तराखंड के लिहाज से देखें तो ढाई माह बाद 28 नवंबर को सर्वाधिक 36 नए कोविड केस सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश भी जारी कर दिए हैं। हमें डरना नहीं है लेकिन अब फिर से अति सतर्क होने का समय है। आगे तीज-त्योहार के अलावा लोकतंत्र का सबसे बड़ा पर्व चुनाव आ रहा है। आमजन को मास्क, शारीरिक दूरी और सेनेटाइजर प्रयोग को दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बना लेना चाहिए। सरकार को चाहिए कि टीकाकरण व बार्डर पर चेकिंग की रफ्तार बढ़ाए। प्रशासन व स्वास्थ्य महकमे को पर्यटकों की जांच में तेजी दिखानी होगी। पिछली बार धड़ल्ले से अस्पतालों में जो आक्सीजन प्लांट व कन्संट्रेटर लगाए गए थे उन्हें भी समय रहते चेक किया जाए।

नेताओं की दूर वाली दृष्टि

विधानसभा चुनाव सामने हैं। नेताओं की जुबान से वादे और घोषणाओं की लार टपक रही है। ऐसा लग रहा है कि मानो अमुक पार्टी को सत्ता मिल गई तो बहार ही जाएगी। सारी समस्याएं छूमंतर हो जाएंगी और जनता के सारे कष्ट दूर हो जाएंगे। सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य दल पूरा जोर लगाए हुए हैं। अभी किसी ने विधिवत घोषणापत्र जारी नहीं किया है। लेकिन सभा व बैठकों के अलावा प्रचार-प्रसार के माध्यमों में जनता को लुभाने की हर कोशिश की जा रही है। हां, एक बात जरूर है कि दूरस्थ इलाकों तक भी नेता पहुंचने लगे हैं। भाजपा व कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच तो जैसे दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचने की प्रतिस्पद्र्धा चल रही है। नेताओं के इन सपनों की दूर वाली दृष्टि को हालांकि जनता ठीक से समझ रही है। मगर राजनीति का एक सच यह भी है जनता भी चुनावी साल के दौरों को लेकर अभ्यस्त सी हो गई है।

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