खस्ताहाल सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने का आदेश, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण विद्यालयों की हालत पर गंभीर

प्राधिकरण के सचिव सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि शंकर मिश्रा ने बदहाली का दंश झेल रहे प्राथमिक विद्यालय सलोनी व अन्य सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के आदेश दिए हैं। साथ ही मुख्य शिक्षाधिकारी को तीन दिन में इस दिशा में की गई कार्यवाही से अवगत कराने को कहा है।

Prashant MishraThu, 05 Aug 2021 11:24 PM (IST)
विद्यार्थी शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित हो सकते हैं।

जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रवि शंकर मिश्रा ने बदहाली का दंश झेल रहे प्राथमिक विद्यालय सलोनी व अन्य सरकारी स्कूलों की दशा सुधारने के आदेश दिए हैं। साथ ही मुख्य शिक्षाधिकारी को तीन दिन में इस दिशा में की गई कार्यवाही से अवगत कराने को कहा है।

सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रविशंकर ने कहा है कि भारत के संविधान में संशोधन करते हुए अनुच्छेद-21 (ए) के अनुसार शिक्षा के अधिकार को मूल अधिकार बनाया गया है। यदि स्कूल व कॉलेज के भवन जीर्णशीर्ण व खस्ताहाल अवस्था में होंगे तो अध्ययन तथा अध्यापन कार्य भी प्रभावित होगा। विद्यार्थी व शिक्षक के जीवन पर भी खतरा बना रहेगा। उन्होंने कहा है कि अल्मोड़ा एक पर्वतीय जिला है जहां बारिश भी अत्यधिक होती है। यदि भवन अच्छी स्थिति में नहीं होंगे तो उनके गिरने की भी संभावना लगातार बनी रहेगी और विद्यार्थी शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित भी हो सकते हैं।

सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रविशंकर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय (नैनीताल) की ओर से सामाजिक कार्यों के संबंध में दिए गए आदेश के तहत बीती 30 जुलाई को अल्मोड़ा जनपद के विद्यालयों की जीर्णशीर्ण अवस्था के संबंध में एक पत्र प्रेषित किया गया था। इसका अब तक कोई जवाब प्राधिकरण को नहीं मिला है। उन्होंने 'दैनिक जागरणÓ में चार अगस्त के अंक में प्रकाशित रानीखेत के प्राथमिक विद्यालय सलोनी (ताड़ीखेत ब्लॉक) की दयनीय स्थिति का संज्ञान लेते हुए अन्य जीर्णशीर्ण विद्यालयों की दशा सुधार व कार्यवाही संबंधी रिपोर्ट तीन दिन के भीतर देने का आदेश दिया है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.