बारिश में सरकार पर बरसीं नर्सें, संविदा पर कार्यरत को वरीयता देने की मांग

नर्सों का का कहना है कि सरकार हमारी मांगों की उपेक्षा कर रही है। जबकि हम लोग कोविड के दौर में लगातार लोगों की सेवा में जुटे रहे। पिछले कई महीनों से जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।

Prashant MishraSat, 12 Jun 2021 01:50 PM (IST)
बारिश के बीच बुद्ध पार्क में धरना दिया और सरकार के निर्णय की जमकर आलोचना की।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : राज्य में सरकार ने नर्सों की भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी है। यहां तक कि 15 जून को लिखित परीक्षा भी तय कर दी है, लेकिन संविदा व उपनल के तहत लंबे समय से कार्यरत नर्सें भड़क गई। उन्होंने बारिश के बीच बुद्ध पार्क में धरना दिया और सरकार के निर्णय की जमकर आलोचना की।

नर्सों का का कहना है कि सरकार हमारी मांगों की उपेक्षा कर रही है। जबकि हम लोग कोविड के दौर में लगातार लोगों की सेवा में जुटे रहे। पिछले कई महीनों से जनप्रतिनिधियों से लेकर विभागीय अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। सरकार को तत्काल परीक्षा स्थगित कर देनी चाहिए।

ये हैं प्रमुख मांगें

- वर्षवार नियुक्ति निकाली जाए

- संविदा पर कार्यरत नर्सों को स्थायी किया जाए

- परीक्षा केवल नए अभ्यर्थियों की की जाए।

आक्रोशित नर्सों ने आंदोलन तेज करने की दी धमकी

सरकार अगर परीक्षा जारी रखती है तो हमें आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा। हमें से कई लोगों लोग आवेदन भी नहीं कर पाए। पिछले 10 वर्षों से नौकरी के इंतजार में उम्र भी निकल गई। इस बीच तमाम नर्सें संविदा व उपनल के जरिये कोविड ड्यूटी के अलावा दुर्गम क्षेत्रों में कार्यरत हैं। संगीता का कहना है कि सरकार को हमारे बारे में गंभीरत से विचार करना ही चाहिए। नर्सों का कहना है कि वे कोरोना काल में जान दांव पर लगाकर ड्यूटी कर रहीं हैं। इससे पहले भी वह बाखूबी काम करती रहीं हैं। ऐसे में उन्हें वरीयता मिलनी चाहिए। यह उनका हक बनता है।

कैबिनेट मंत्री ने सीएम से भी किया था अनुरोध

उपनल व संविदा में कार्यरत नर्सों को भर्ती प्रक्रिया में प्राथमितकता दिए जाने को लेकर कैबिनेट मंत्री बंशीधर भगत ने मुख्यमंत्री तीरथ िसंह रावत से मुलाकात की। उन्होंने कहा था कि लंबे समय से कार्यरत नर्सों को स्थायी किया जाए। वहीं विपक्षी दल के नेता भी मुख्यमंत्री ने नर्सों की मांगों पर गंभीरत से विचार करने की मांग कर चुके हैं।

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