Night curfew in Pithauragarh : बच्चों पर गुलदार के हमलों के चलते उत्तराखंड में पहली बार लगा नाइट कर्फ्यू

Night curfew in Pithauragarh पिथौरागढ़ में गुलदारों का खौफ इस कदर बढ़ गया कि प्रशासन को नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला लेना पड़ा है। पहली बार यह स्थिति इसलिए भी बनी है क्योंकि इस साल गुलदार ने चार लोगों में तीन बच्चों को शिकार बनाया है।

Prashant MishraThu, 23 Sep 2021 06:33 AM (IST)
पिछले साल कोविड कफ्र्यू के दौरान जिले में 11 लोग गुलदारों का निवाला बने थे।

जागरण संवाददाता, पिथौरागढ़ : Night curfew in Pithauragarh : कानून व्यवस्था ध्वस्त होने या दंगों के चलते कर्फ्यू लगने की बात सभी जानते हैं। कोविड काल में भी पिछले साल पहली बार दिन-रात का कफ्र्यू लोगों ने देखा। अब पिथौरागढ़ नगर में पहली बार गुलदारों के खौफ से नाइट कर्फ्यू लगाना पड़ा है तो सभी हैरत में हैं। पिथौरागढ़ नगर में गुलदारों का खौफ इस कदर बढ़ गया कि प्रशासन को नाइट कर्फ्यू लगाने का फैसला लेना पड़ा है। पहली बार यह स्थिति इसलिए भी बनी है क्योंकि इस साल गुलदार ने चार लोगों में तीन बच्चों को शिकार बनाया है। पिछले साल कोविड कर्फ्यू के दौरान जिले में 11 लोग गुलदारों का निवाला बने थे। 

रविवार रात्रि नगरपालिका क्षेत्र के बजेटी वार्ड के पाटा तोक में गुलदार ने घर के अंदर घुस कर सात वर्षीय बालिका मानसी को मार डाला था। दो दिन बाद वन विभाग द्वारा लगाए गए पिंजरे में एक गुलदार फंस गया। इस दौरान सीसीटीवी में तीन अन्य गुलदार भी नजर आए। यह सब नगर क्षेत्र के अंदर की बात है। इस घटना के बाद पिथौरागढ़ नगर के तमाम स्थानों पर दिन ढलते ही कफ्र्यू जैसे ही हालात नजर आ रहे थे। लोगों ने खेतों और बाजार निकलना कम कर दिया था। समूह में ही महिलाएं भी जरूरी काम निपटा रही थी। स्कूल जाने वाले बच्चे सहमे हुए थे।

चार इंसान, दो गुलदारों की मौत 

गुलदार ने इस साल अब तक पिथौरागढ़ृ नगर से लगे क्षेत्र में चार लोगों को अपना शिकार बनाया। जिसमें तीन बच्चे शामिल रहे हैं। वन विभाग द्वारा तैनात किए गए शिकारियों ने दो आदमखोर गुलदारों को ढेर भी किया है। पिछले वर्ष जिले में गुलदारों ने 11 लोगों शिकार बनाया।

मानव और गुलदार दोनों जिंदा रहे इसलिए लिया फैसला : डीएम

डीएम आशीष चौहान ने बताया कि मानव ओर गुलदार दोनों जिंदा रहें, इसे ध्यान में रखते हुए नगर के पौण, पपदेव, जीआइसी, रई, चंडाक, बजेटी में नाइट कफ्र्यू लगाना पड़ा है। मानवों और गुलदार दोनों के जीवन की रक्षा करना जरूरी हो गया है। खासकर बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। 

इस वर्ष की घटनाएं

- तहसील गंगोलीहाट में दो बच्चे, पिथौरागढ़ में एक बालिका और डीडीहाट में एक महिला गुलदार की शिकार बनी है। बीते वर्ष गुलदारों का शिकार अधिकांश महिलाए रही इस वर्ष बच्चे गुलदार के शिकार हो रहे है। - अगस्त में नगर से सटे नैनीसैनी में आत्मरक्षा के लिए एक ग्रामीण नरेश सौंन ने धारदार हथियार से गुलदार को ही मौत के घाट उतार दिया। यह घटना पूर्वाह्न 11 बजे हुई थी।  - गंगोलीहाट में जरमाल गाव में मां का हाथ पकड़ कर धारे से पानी लाते समय गुलदार नौ वर्षीय बालिका को ले गया। बालिका नेपाल की थी। पिता मजदूरी करते हैं।  - पाली गांव में अपनी बहन के साथ घर से तीस मीटर दूर दुकान से लौट रहे 11 वर्षीय बालक को गुलदार ने शिकार बनाया। 13 वर्षीय बहन ने भाग कर जान बचाई। - 19 सितंबर को नगर के पाटा से घर के अंदर घुस कर गुलदार सात वर्ष की बालिका को उठा कर ले गया। - डीडीहाट में महिला को घर से सौ मीटर दूर शिकार बनाया।

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