एनएच मुआवजा घोटाला : उत्तराखंड की सबसे बड़ी जांच एनएच मुआवजा घोटाला

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : एनएच मुआवजा घोटाला उत्तराखंड की सबसे बड़ी एसआइटी जांच है। अब तक 545 दिन की जांच में एसआइटी 211 करोड़ रुपये घोटाले की पुष्टि कर 22 लोगों को जेल भेज चुकी है। माना जा रहा है कि कई और किसान जहां जेल जा सकते हैं, वहीं घोटाला भी 300 करोड़ तक पहुंच सकता है। एनएच मुआवजा घोटाले में केस दर्ज होने के बाद 15 मार्च 2017 को घोटाले की जांच को एसआइटी का गठन किया गया था। जांच के दौरान एसआइटी ने सात नवंबर को निलंबित पीसीएस भगत ¨सह फोनिया समेत आठ अधिकारी और कर्मचारियों को गिरफ्तार कर गिरफ्तारी का सिलसिला शुरू कर दिया था। करीब 545 दिन की जांच में एसआइटी अब तक 22 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। साथ ही दो आइएएस अफसर भी निलंबित हो चुके हैं। जांच अभी भी जारी है। ऐसे में एसआइटी फाइनल चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि फाइनल चार्जशीट से पहले एसआइटी कई और किसानों की गिरफ्तारी के साथ ही घोटाला 300 करोड़ होने की भी पुष्टि कर सकती है। फाइनल चार्जशीट की तैयारी एसएसपी डॉ . सदानंद दाते ने कहा कि एनएच मुआवजा घोटाले में गिरफ्तार 22 लोगों में से 20 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फाइनल चार्जशीट की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट तैयार हो चुकी है। कुछ दिनों के भीतर कोर्ट में दाखिल कर दी जाएगी। 1700 पन्ने की सूचना नहीं आ सकी काम रुद्रपुर : करीब 1700 पन्ने की सूचना भी आइएएस डॉ. पंकज पांडेय के काम न आ सकी। उम्मीद थी कि यह कागजात पांडेय की राहत का जरिया बनेंगे, लेकिन उन पर गाज गिर गई। बता दें कि शासन को भेजी गई एसआइटी की रिपोर्ट पर घिरे डॉ. पंकज पांडेय ने सूचना अधिकार में जीवन भय दिखाते हुए छह ¨बदुओं पर महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं। इसमें एक अप्रैल 2014 से मार्च 2017 तक हुई बैठकों का कार्यवृत, मिशलबंद रजिस्टर की प्रतियां, शासन व एनएचएआइ की ओर से किया पत्राचार, केस डायरी व कोर्ट केस से जुड़ी पत्रावलियां शामिल थीं। करीब 1700 पन्नों की यह सूचना तत्कालीन डीएम डॉ. पांडेय को उपलब्ध भी करा दी गई थी। यह माना जा रहा था कि यह सूचना पांडेय के लिए मददगार बनेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आखिर डॉ. पांडेय पर गाज गिर ही गई। उन्हें निलंबित कर दिया गया। अभियोजन की स्वीकृति ले सकती है एसआइटी मुआवजा घोटाले में पांच पीसीएस के जेल जाने के बाद अब आइएएस के गले फंदा फंसा है। डॉ. पंकज पांडेय और चंद्रेश यादव निलंबित किए जा चुके हैं। अब इन दोनों के खिलाफ अभियोजन की एसआइटी शासन से स्वीकृति ले सकती है, हालांकि एसआइटी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रही है। आइएएस पर कोई बोलने को तैयार ही नहीं है। चर्चा यहां तक है कि जो प्रक्रिया पीसीएस पर अपनाई गई, वही आइएएस पर भी अपनाई जा सकती है।

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