डीएम की चेतावनी के बाद भी नहीं खुला नैनीताल का दुर्गा लाल साह पुस्तकालय

Nainital Durga Lal Sah library नैनीताल में ऐतिहासिक माना जाने वाला दुर्गा लाल साह पुस्तकालय के संचालन को लेकर पालिका और एडीबी की सुस्ती नहीं टूट रही है। विभागीय अधिकारियों को उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देशो का भी डर नहीं रह गया है।

Skand ShuklaSun, 28 Nov 2021 11:05 AM (IST)
डीएम की चेतावनी के बाद भी नहीं खुला नैनीताल का दुर्गा लाल साह पुस्तकालय

नैनीताल, जागरण संवाददाता : नैनीताल में ऐतिहासिक माना जाने वाला दुर्गा लाल साह पुस्तकालय के संचालन को लेकर पालिका और एडीबी की सुस्ती नहीं टूट रही है। विभागीय अधिकारियों को उच्चाधिकारियों के सख्त निर्देशो का भी डर नहीं रह गया है। यही कारण है कि डीएम की चेतावनी के बाद भी पुस्तकालय का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। जिस कारण पठन पाठन में रुचि रखने वाले पुस्तक प्रेमी निराश है।

बता दें कि ब्रिटिशकाल में शहरवासी मोहनलाल साह के प्रयासों से पुस्तकालय का निर्माण किया गया था। उनकी मांग और प्रयासों को देखते हुए 1946 में पुस्तकालय का नाम दुर्गा लाल साह म्युनिसिपल पब्लिक लाइब्रेरी कर दिया गया। जिसके बाद से नगर पालिका द्वारा ही इस पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा है। मगर देखरेख के अभाव में झील के बगल में स्थित पुस्तकालय की हालत जीर्णशीर्ण हो गयी।

इसके संरक्षण के लिए एडीबी वित्त पोषित इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट इन्वेस्टमेंट प्रोग्राम फॉर टूरिज्म योजना के तहत 2016 में जीर्णोद्धार कार्य शुरू किया गया। जिसमें करीब डेढ़ करोड़ की लागत से भवन में कई कार्य किए जाने थे। मगर पांच वर्ष गुजरने के बावजूद न तो पुस्तकालय का कार्य पूरा हो पाया है और न इसे पालिका को हस्तांतरित किया गया है। नतीजतन बीते पांच वर्षों से पुस्तकालय में ताला लटका है।

जिसे देखते हुए बीते 13 नवम्बर को डीएम धीराज गर्ब्याल ने एडीबी अधिकारियों को पत्र जारी कर एक सप्ताह में कार्य पूरा कर पुस्तकालय पालिका को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए थे। साथ ही चेताया था कि यदि जल्द कार्य पूरा नहीं हुआ तो उनके खिलाफ प्रतिकूल अमल में लाई जाएगी। डीएम के आदेश को दो सप्ताह बीत गया है। मगर न तो पुस्तकालय का कार्य पूरा हो पाया और न ही इसे पालिका को हस्तांतरित किया जा सका है।

कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा था पुस्तकालय

दुर्गा लाल साह पुस्तकालय शहर का एकमात्र पब्लिक पुस्तकालय है। जहां रोजाना शहरवासियो के साथ ही पर्यटक भी किताबों के साथ समय बिताते थे। जीर्णोद्धार कार्य से पूर्व पुस्तकालय कई लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा हुआ करता था। सुबह से ही कई बुजुर्ग अखबार और किताबो का अध्ययन करने यहा जाया करते थे। मगर पांच वर्ष से पुस्तकालय बंद होने के कारण शहर के तमाम पुस्तक प्रेमी निराश है। कई लोगों की दिनचर्या भी गड़बड़ा गयी है। प्रोजेक्ट अभियंता, एडीबी एचसी शर्मा ने बताया कि पालिका अधिकारियों के साथ मिलकर पुस्तकालय का निरीक्षण कर कमिया चिन्हित की गई है। जिसमें कुछ फर्नीचर बदला जाना है। जल्द इसे पूरा कर पालिका को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

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