फिर धंसने लगा नैनीताल-भवाली रोड, बलियानाला को ट्रीटमेंट नहीं मिलना बन रहा कारण

बारिश के चलते नैनीताल-भवाली मोटरमार्ग पर कैलाखांन के समीप दरारें उभर आई है। साथ ही सड़क का करीब 70 मीटर हिस्सा धसने लगा है। हालांकि लोनिवि ने सुरक्षा की दृष्टि से दरार वाले हिस्से में पत्थरों की मेढ़ बना कर क्षतिग्रस्त हिस्से में वाहनों की आवाजाही रोक दी है।

Skand ShuklaSun, 25 Jul 2021 10:06 AM (IST)
फिर धंसने लगा नैनीताल-भवाली रोड, बलियानाला को ट्रीटमेंट नहीं मिलना बन रहा कारण

नैनीताल, जागरण संवाददाता : बीते दिनों बारिश के चलते नैनीताल-भवाली मोटरमार्ग पर कैलाखांन के समीप दरारें उभर आई है। साथ ही सड़क का करीब 70 मीटर हिस्सा धसने लगा है। हालांकि लोनिवि ने सुरक्षा की दृष्टि से दरार वाले हिस्से में पत्थरों की मेढ़ बना कर क्षतिग्रस्त हिस्से में वाहनों की आवाजाही रोक दी है। मगर हर वर्ष सड़क में भूधसाव होना बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है। जिसे समय रहते उपचार नहीं मिला तो सड़क पूरी तरह धस सकती है। बलियानाले की तलहटी पर लगातार हो रहे भूकटाव के चलते सड़क तक इसका असर देखने को मिल रहा है।

बता दें कि भूगर्भीय दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले बलियानाला की तलहटी पर लगातार भू-कटाव जारी है। पहाड़ी से निकल रहे जल स्रोतों के साथ भारी मिट्टी, मलबा और पत्थर निकलने से नाले की जड़े खाली हो रही है। जिससे हरि नगर क्षेत्र की ओर भूस्खलन हो रहा है तो, पहाड़ी की दूसरी ओर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। तलहटी पर हो रहे भू कटाव के कारण कैलाखान के समीप नैनीताल-भवाली मोटर मार्ग पर दरारें उभर आई हैं। जिससे सड़क का करीब 70 मीटर हिस्सा खतरे की जद में आ गया है।

सड़क में हर वर्ष हो रहा भूधसाव कैलाखान के समीप नैनीताल- भवाली मोटर मार्ग में बरसात के दौरान बीते कुछ वर्षों से लगातार भूधसाव हो रहा है। जिससे वाहनों की आवाजाही में परेशानी तो होती ही है, भूस्खलन की संभावना होने से खतरा बना हुआ है। ऐसे में लोनिवि द्वारा दरार वाले हिस्से में पत्थर और मिट्टी की मेढ़ बनाकर वाहनों की आवाजाही रोकी जा रही है। मगर सड़क को कोई स्थाई उपचार नहीं दिया जा रहा। जिससे भविष्य में है बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है।

बलियानाला ही है भूधसाव का कारण

बलियानाला की तलहटी पर हो रहे कटाव से दोनों और की पहाड़ियां प्रभावित हो रही हैं। जिस कारण ही नैनीताल-भवाली मोटर मार्ग में भी धसाव हो रहा है। पर्यावरणविद प्रो अजय रावत ने बताया कि वर्षों से दोनों पहाड़ियों पर भूस्खलन और भू कटाव जारी है। जिस की रोकथाम के लिए पहाड़ी की तलहटी से ही इसे स्थाई उपचार देना होगा।

मेन बाउंड्री थर्स्ट है बलिया नाले में भूस्खलन का कारण

प्रो रावत बताते हैं कि हनुमानगढ़ी से रानीबाग तक के क्षेत्र में मेन बाउंड्री थ्रस्ट रेखा होकर गुजरती है। यह शिवालिक तथा लैसर हिमालय की विभाजक रेखा है। दो हिमालय क्षेत्र मिलने के कारण इस जगह के शैलो में भिन्नता है। शैलो में परिवर्तन होने से भूगर्भीय हलचल होती रहती है। वही नैनीताल झील के बीच से गुजरने वाला मनोरा देवपाटा फॉल्ट बलियानाले के समीप मेन बाउंड्री थ्रस्ट से होकर मिलता है। जिससे भूगर्भीय दृष्टि से बलियानाला क्षेत्र अति संवेदनशील बना हुआ है।

बलियानाले कि तलहटी पर स्थाई उपचार से ही मिलेगा निदान

अधिशाषी अभियंता लोनिवि दीपक गुप्ता ने बताया कि बीते कुछ वर्षों से सड़क का लंबा हिस्सा धंस रहा है। कई बार सड़क किनारे सुरक्षा दीवार लगा दी गयी है, मगर अगले वर्ष वह फिर टूट जाती है। बलियानाले कि तलहटी पर स्थाई उपचार शुरू हो तभी सड़क धसने की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। फिलहाल दरारों के किनारे पत्थर लगाकर सुरक्षात्मक कार्य किया गया है।

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