बालिका दिवस : मुनस्यारी की फुटबाल खिलाड़ी बेंग्लुरू यूनाइटेड क्लब के लिए चयनित

दिया का अगला लक्ष्य देश की तरफ से राष्ट्रीय टीम में स्थान पाने का है।

उसकी लगन देख पिता को भी यकीन था कि दिया एक दिन मुकाम जरूर हासिल करेगी। और हुआ भी ऐसा ही। पिता के सपनों के अनुरूप दिया दिया का चयन बालिका दिवस सप्ताह के दौरान बेंग्लुरू यूनाइटेड फुटबाल क्लब के लिए हो गया है।

Publish Date:Sat, 23 Jan 2021 08:14 PM (IST) Author: Prashant Mishra

मुनस्यारी, (पिथौरागढ़) देवेंद्र सिंह। सीमांत क्षेत्र आज भी खेलकूद के क्षेत्र में सुविधाओं-संसाधनों को तरस रहा है। विकट हालातों के बावजूद अपनी धुन पक्के प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपना नाम का डंका बजा ही डालते हैं। तहसील मुनस्यारी के बूंगा गांव की दिया राणा भी एक ऐसा ही नाम है। दिया का फुटबाल के प्रति जूनून देखते ही बनता है। पिता चालक हैं। माली हालत भी इतनी बेहतर नहीं कि अपने स्तर पर संसाधन जुटा सके। बावजूद इसके बेटी ने कभी शिकायत नहीं की। उसकी लगन देख पिता को भी यकीन था कि दिया एक दिन मुकाम जरूर हासिल करेगी। और हुआ भी ऐसा ही। पिता के सपनों के अनुरूप दिया दिया का चयन बालिका दिवस सप्ताह के दौरान बेंग्लुरू यूनाइटेड  फुटबाल क्लब के लिए हो गया है। अपनी बच्ची की इस उपलब्धि पर पिता के आंसू छलक आए। लाजिमी है। अभावों और विपरीत हालातों से हार न मानते हुए साहसी और प्रतिभाशाली बेटी ने उनका ही नहीं पूरे सीमांत जिले का नाम रोशन जो कर दिया है।

मुनस्यारी में प्रतिवर्ष जून में जिले की प्रतिष्ठित जोहार खेल प्रतियोगिता होती है। जोहार क्लब के तत्वावधान में वर्ष 2013 से बालिका फुटबाल प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया गया। बूंगा गांव की दिया राणा भी एक टीम से खेली। दिया की प्रतिभा देख आयोजक समेत खेल प्रेमी भी हैरत में थे।

 दिया के पिता चंद्र सिंह राणा पेशे से चालक जबकि मां गृहिणी हैं। माली हालत खराब होने के चलते स्वजन दिया को प्रशिक्षण के लिए बाहर भेज पाने में असमर्थ थे। दूसरी ओर, दिया नियमित रूप से फुटबाल खेल रही थी। अभ्यास में कोई कसर नहीं छोड़ी। मेहनत रंग लाई और उसका चयन महाराणा प्रताप स्पोट्र्स कालेज देहरादून मेंं हो गया। तीन वर्ष पूर्व अंडर 16 राष्ट्रीय बालिका फुटबाल के लिए चयन हो गया। प्रतिभा निखरती गई और अब 19 वर्षीय दिया का चयन बंगलुरु  यूनाइटेड क्लब के लिए हो चुका है। चीन सीमा से लगी मुनस्यारी तहसील के एक छोटे से गांव से निकली इस बालिका की इस उपलब्धि को सीमांतवासी पूरे जिले के लिए गौरव मानते हैं। वहीं दिया का कहना है कि उसने सपने में भी ऐसी उपलब्धि के बारे मेंं सोचा नहीं था। शनिवार को बालिका दिवस सप्ताह के अवसर पर यह खुशखबरी उसके लिए बहुत मायने रखती है। दिया का अगला लक्ष्य देश की तरफ से राष्ट्रीय टीम में स्थान पाने का है।

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