औषधीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जीबी पंतनगर विश्वविद्यालय और शून्य इंडिया के बीच हुआ समझौता

विवि के कुलपति सभागार में सोमवार को निदेशक शोध डा. एएस नैन ने अतिथियों का स्वागत किया।डा. एमएस नेगी संयुक्त निदेशक शोध (बौद्धिक संपदा प्रबंधन) ने स्टार्ट अप शून्य इंडिया के अस्तित्व में आने व औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादों की जानकारी ली।

Prashant MishraMon, 20 Sep 2021 10:10 PM (IST)
वैज्ञानिकों से इस प्रकार के नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने व कृषि आधारित उद्योगों को बल देने का आह्वान किया।

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विवि व शून्य इंडिया के बीच औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पादों पर अनुबंध किया गया। विवि स्थित इनक्यूबिटी व स्टार्ट अप शून्य इंडिया के निदेशक सागर नाथ के साथ औषधीय एवं सगंध पौधों पर आधारित उत्पादों जैसे काली हल्दी, अंबा हल्दी, पहाड़ी हल्दी लाते (पेय पदार्थ) व कई प्रकार के हर्बल इन्फ्यूज़न (हर्बल टी), इम्यूनिटी व लिवर बूस्टर आदि तकनीकी प्रयोग एवं व्यावसायिक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कुलपति व सागर नाथ ने हस्ताक्षर किए।जिससे भविष्य में उत्पादों का उत्पादन एवं विपणन शून्य इंडिया द्वारा किया जाएगा। जबकि इसमें विवि तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा।

विवि के कुलपति सभागार में सोमवार को निदेशक शोध डा. एएस नैन ने अतिथियों का स्वागत किया।डा. एमएस नेगी, संयुक्त निदेशक, शोध (बौद्धिक संपदा प्रबंधन) ने स्टार्ट अप शून्य इंडिया के अस्तित्व में आने व औषधीय एवं सगंध पौधों के उत्पादों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि इससे किसानों विशेष रूप से अच्छा बाजार मिल सकेगा। कार्यक्रम की अगुवाई करते हुए कुलपति डा.तेज प्रताप ने कहा कि इस प्रकार के उद्यमों से राज्य की युवा पीढ़ी को भविष्य में रोजगार के साधन उपलब्ध हो पाएंगे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में न्यू एज फार्मर (नए जमाने के किसान) कृषि क्षेत्र में क्रांति ला सकते हैं। एक स्टार्ट अप को औषधीय एवं सगंध पौधों के क्षेत्र में सफलता प्राप्त हो रही है। उन्होंने वैज्ञानिकों से इस प्रकार के नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करने व कृषि आधारित उद्योगों को बल देने का आह्वान किया। इस मौके पर पंत बिजनेस पार्क के सीईओ डा. एसके शर्मा, डा. सुभाश चंद्रा, डा. केपी सिंह, डा. पीके सिंह, डा. अनिक कुमार चहल सहित संयुक्त निदेशक, शोध निदेशालय, डा. अजय श्रीवास्तव, सहायक निदेशक शोध आदि मौजूद थे।

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