Bharat Bandh : व्यापारी संगठनों का बंद को समर्थन, दुकान बंद करने को लेकर क्षेत्रीय इकाइयां लेंगी फैसला

Bharat Bandh व्यापारी संगठनों ने किसान संगठनों की ओर से आयोजित भारत बंद को समर्थन देने का एलान किया है। देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष हुकम सिंह कुंवर ने कहा है कि संगठन 27 सितंबर को आहूत किसानों के शांतिपूर्ण भारत बंद को समर्थन देता है।

Skand ShuklaMon, 27 Sep 2021 08:35 AM (IST)
Bharat Bandh : व्यापारी संगठनों का बंद को समर्थन, दुकान बंद करने को लेकर क्षेत्रीय इकाइयां लेंगी फैसला

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Bharat Bandh : व्यापारी संगठनों ने किसान संगठनों की ओर से आयोजित भारत बंद को समर्थन देने का एलान किया है। देवभूमि उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष हुकम सिंह कुंवर ने कहा है कि संगठन 27 सितंबर को आहूत किसानों के शांतिपूर्ण भारत बंद को समर्थन देता है। किच्छा, रुद्रपुर, बाजपुर, काशीपुर, गदरपुर, सितारगंज, खटीमा, इकाई बंद को पूर्ण समर्थन करेंगी।

अन्य जगहों पर नगर इकाइयों से अपने स्तर से फैसला लेने को कहा है। प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा ने बताया कि किसानों की मांग का संगठन समर्थन करता है, लेकिन बंद को लेकर स्थानीय व जिला इकाई अपने स्तर से फैसला लेंगी। कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया ने कहा है कि पीसीसी अध्यक्ष गणेश गोदियाल के निर्देश पर ब्लॉक से लेकर जिला कार्यकारिणी अपने क्षेत्र में किसानों को समर्थन देगी।

जोर-जबरदस्ती करने वालों पर पुलिस करेगी सख्ती

एसपी सिटी डा. जगदीश चंद्र ने बताया कि जोर-जबरदस्ती व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद कराने वालों पर पुलिस की नजर रहेगी। ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त पुलिस फोर्स के अलावा पीएससी भी लगाई जाएगी।

बीमा कर्मचारियों का भारत बंद को समर्थन

बीमा कर्मचारी संगठनों ने 27 सितंबर को आयोजित किसान संगठनों के भारत बंद को समर्थन दिया है। बीमा कर्मचारी संघ के कुमाऊं मंडल सचिव कामरेड डीके पांडे ने कहा कि सरकार को तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करना चाहिए। नए कृषि कानूनों के लागू होने से खाद्यान्न पूंजी पतियों के गोदामों में भरा होगा और देश में भुखमरी पैदा होगी। भविष्य में खाद्य सुरक्षा जैसी बात बेमानी साबित होगी। उन्होंने कहा कि जिस ढंग से पिछले साल नए कृषि कानून बनाए गए और पुराने श्रम कानून खत्म किए गए हैं। जिस तेजी से सभी संस्थानों का बिना विरोधी आवाजों को सुनें निजीकरण किया जा रहा है वह देश और लोकतंत्र के लिए घातक है।

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