मातृशक्ति ने लगाए महाऔषधीय बरगद के पौधे, विवेकानंद की तपोस्थली काकड़ीघाट में हुआ श्रीगणेश

समूचे पहाड़ में वटसावित्री का व्रत ले मातृशक्ति ने महाऔषधीय वृक्ष बरगद के पौधे लगाए। विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बीच प्राणवायु देने व पंचायंग उपयोग वाले वटवृक्ष के पौधों का लालन पालन कर जीवनभर उसके संरक्षण का संकल्प लिया।

Prashant MishraThu, 10 Jun 2021 10:47 PM (IST)
बरगद के पौधे लगाने का श्रीगणेश युग पुरुष की तपोस्थली काकड़ीघाट से की गई।

जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा : महासंकट को मात देने के लिए समूचे पहाड़ में वटसावित्री का व्रत ले मातृशक्ति ने 'महाऔषधीय वृक्ष' बरगद के पौधे लगाए। विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बीच प्राणवायु देने व पंचायंग उपयोग वाले वटवृक्ष के पौधों का लालन पालन कर जीवनभर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। बरगद के पौधे लगाने का श्रीगणेश युग पुरुष की तपोस्थली काकड़ीघाट से की गई। 

स्वामी विवेकानंद सेवा समिति की ओर से गुरुवार को 'दैनिक जागरण' की पहल पर महिलाओं ने सिद्ध बाबा नीम करोलीमहाराज के ध्यानस्थल स्थित हनुमान मंदिर परिसर पर सैकड़ों वर्ष पुराने वटवृक्ष के जोड़े की परिक्रमा व पूजा अर्चना के बाद मुहिम शुरू की। पंडिताचार्य पं. नदाबल्लभ कांडपाल ने विवेकानंद वाटिका के पास खाली पड़ी उस भूमि का पूजन किया, जहां पौधे लगाए जाने थे। इसके बाद समिति अध्यक्ष हरीश चंद्र सिंह परिहार की ओर से वटवृक्ष के पौंधे बांटे गए। कुछ प्रकृति प्रेमियों ने कांडा व नौगांव के खेतों में भी पौधे लगाए। 

इन्होंने पौधे लगा ली संरक्षण की शपथ

काकड़ीघाट में स्कूल संचालिका जानकी ढौंढियाल, शिक्षिका विमला रावत, ग्राम प्रधान नौगांव जानकी देवी, पूर्व प्रधान हेमा परिहार, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य लीला कनवाल, गीता छिमवाल, रेखा कांडपाल व माया फर्त्याल। 

गोल्ज्यू मंदिर में पल्लवित होगा कुंभलगढ़ का बरगद 

सोमेश्वर : कोसी घाटी में बसे मनान स्थित न्याय देवता गोल्ज्यू मंदिर के पास वन क्षेत्र में कुंभलगढ़ (राजस्थान) से लाया गया बरगद का पौधा पल्लवित होगा। पर्यावरण प्रेमी प्रिया मेहता तीन वर्ष पूर्व वीरों की धरती से यह नन्हा पौधा गांव लाई थी। इस अवधि में प्रिया ने इसे घर में ही गमले में लगाकर पालन पोषण किया। वटसावित्री पर्व पर उन्होंने इस पौधे को लोकदेवता गोलू महाराज के मंदिर के पास लगा इसके संरक्षण की शपथ ली। प्रिया ने कहा कि महाऔषधीय वृक्ष बरगद केवल ऑक्सीजन ही नहीं देता बल्कि इसकी जड़, तना, पत्तियां, फूल व फल सभी विभिन्न रोगो के इलाज में औषधीय उपयोग होता है। इसीलिए इसे पंचांग उपयोग वाला महावृक्ष भी माना गया है। उन्होंने कहा कि कोसी वैली में कुछ और पौधे मंगा कर इन्हें विस्तार व संरक्षण दिया जाएगा। 

अल्मोड़ा नगर के पास लगाया वटवृक्ष 

नगर क्षेत्र से लगे करबला तिराहा निवासी विनीता डालाकोटी ने भी वटसावित्री के विशेष पूजन के बाद घर के पास ही वटवृक्ष का पौधा लगा आजीवन देखभाल का संकल्प लिया।

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