घर में चल रही थी शादी की तैयारी, बाॅर्डर से आई मेजर चित्रेश के शहादत की खबर

रानीखेत, दीप बोरा : पुलवामा हमले के बाद ही सीमा पर नौशहरा के झंगड़ सेक्टर में विस्फोट में रानीखेत का लाल भी शहीद हो गया। ताड़ीखेत ब्लाक के पीपली गांव निवासी शहीद मेजर चित्रेश सिंह बिष्ट का पैतृक गांव शोक में डूबा है। पूरा गांव मेजर चित्रेश की शादी में जाने के लिए उत्साहित था, लेकिन शनिवार को आई खबर ने उन्हें गम में डुबो दिया।

ताड़ीखेत के छोटे से गांव पीपली के लोगों को फख्र था कि उनका बेटा सेना में अफसर है। अभी दो माह पहले ही चित्रेश के पिता सुरेंद्र सिंह गांव आए थे। सभी को चित्रेश की सात मार्च को होने जा रही शादी को न्यौता भी दे गए थे। सभी के लिए यह खुशी का मौका था कि मेजर बेटे की शादी में शरीक होने देहरादून जाएंगे। रात जब जागरण की टीम गांव पहुंची और चित्रेश की शहादत की खबर दी तो सबके चेहरे उतर गए। मातमी सन्नाटे के बीच चित्रेश के ताऊ रघुवर सिंह बिष्ट, चाचा पंचम बिष्ट, चाची हंसी देवी व बीना बिष्ट तथा चचेरी बहन निकिता आदि को सहसा यकीन ही नहीं हुआ। चाचा रणजीत सिंह बोले, सात मार्च को चित्रेश की शादी थी। सभी ने प्लान बनाया था कि देहरादून जाएंगे। गांव में बड़ी खुशी का माहौल था। दो माह पूर्व ही सुरेंद्र सिंह गांव आए थे। गांव वालों की नींद शहादत की खबर ने उड़ा दी है। मध्य रात्रि तक कोई फोन पर देहरादून में पिता को ढाढस बंधा रहा है तो कोई नाते-रिश्तेदारी में जानकारी दे रहा है। कश्मीर के लगातार बिगड़ रहे हालात, जवानों की शहादत, पाकिस्तान और आतंकियों की नापाक हरकतों को लेकर सभी के अंदर गुस्सा भी है। पीपली गांव रो भी रहा है, आखिर गांव ने एक होनहार बेटा जो खोया है।

इजा-बाबू की आंखों के तारे थे शहीद चित्रेश

रुद्रपुर/रानीखेत : राजौरी में शहादत को प्राप्त चित्रेश इजा व बाबूजी (माता-पिता) की आंखों के तारे थे। सोशल मीडिया पर चित्रेश ने कई जगह माता-पिता के साथ फोटोग्राफ लगा रखा है। गांव के लाल की शहादत की खबर से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं। गांव की माटी से लगाव के चलते परिवार साल में एक बार जरूर आता था। देश के लिए अपनी जान गंवाने वाले शहीद मेजर चित्रेश रानीखेत के पिपली गांव के रहने वाले हैं। इंजीनियरिंग कोर में तैनात चित्रेश परिवार से रोज बात करता था। पिता एसएस बिष्ट बेटे की नौकरी के बाद उनकी शादी की तैयारियों में लगे हुए थे। बेटे की शादी का कार्ड बांटने निकले पिता को जब शहादत की खबर सुनाई दी तो वह खुलकर रो भी न सके। चित्रेश के पिता के दोस्त दिनेश तिवारी सीओ पद से रिटायर हुए हैं। 

30 साल पहले पिता आ गए थे नैनीताल

शहीद मेजर चित्रेश का जन्म भले ही देहरादून में ही हुआ था, लेकिन उनके पिता सुरेंद्र सिंह इंटर की पढ़ाई करने तक गांव में ही रहे। नैनीताल से बीए करने के बाद वह पुलिस में भर्ती हो गए। सुरेंद्र सिंह के भाई गोपाल सिंह बिष्ट जूनियर हाईस्कूल तिपौला (द्वाराहाट) से रिटायर होने के बाद तिपौला में ही बस गए हैं। वह बताते हैं कि पुलिस में भर्ती होने के कुछ समय बाद सुरेंद्र देहरादून ही बस गए। शादी हुई और चित्रेश का जन्म भी वहीं हुआ। परिवार पूजा-पाठ या किसी खास मौके पर साल में एक बार गांव आता ही है।

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