साढ़े पांच लाख हो गया लैप्स, नहीं करा सके सत्यापन, 3001 शिक्षकों के 13 हजार दस्तावेजों का होना है सत्यापन

अध्यापकों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए मिला बजट लैप्स हो गया। ऐसे में एक बार फिर से सत्यापन प्रक्रिया स्थगित हो गई है। इधर विभाग के पास हाईकोर्ट को जवाब देने का समय भी नजदीक आ गया है। हाईकोर्ट इस मामले को लेकर अधिकारियों को तलब कर सकता है।

Prashant MishraWed, 07 Apr 2021 05:14 PM (IST)
ऐसे में करीब आठ हजार दस्तावेजों का सत्यापन कार्य फिर से स्थगित हो चुका है।

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : सहायक अध्यापकों के दस्तावेजों के सत्यापन के लिए मिला बजट लैप्स हो गया। ऐसे में एक बार फिर से सत्यापन प्रक्रिया स्थगित हो गई है। इधर विभाग के पास हाईकोर्ट को जवाब देने का समय भी नजदीक आ गया है। हाईकोर्ट इस मामले को लेकर विभागीय अधिकारियों को तलब भी कर सकता है।

फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई लगभग पूरी कर ली गई है। उच्च न्यायालय ने सभी जनपदों से संबंधित शिक्षकों पर कार्रवाई की आख्या मांगने के साथ ही दिसंबर-जनवरी में प्रारंभिक विद्यालयों में तैनात सहायक अध्यापकों के दस्तावेजों का फिर से सत्यापन करने के आदेश दिए थे। साथ ही तीन माह के भीतर दस्तावेजों को सत्यापित कराकर कोर्ट में आख्या प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे।

ऊधम सिंह नगर में 3001 शिक्षकों के करीब 13 हजार दस्तावेजों का सत्यापन होना है। जिन विवि एवं संस्थानों में सत्यापन निश्शुल्क था उनमें विभाग ने करीब साढ़े चार हजार दस्तावेजों का सत्यापन करा लिया था। इसके बाद अन्य विवि एवं संस्थानों में 27 रूपये से लेकर 2760 रुपये प्रति दस्तावेज सत्यापन शुल्क निर्धारित है। ऐसे में विभाग ने हाथ खड़े कर दिए थे, और शासन स्तर पर सत्यापन कराने के लिए जनवरी में डिमांड भेजी थी। जिसके बाद दो किस्तों में छह लाख 86 हजार 230 रुपये प्राप्त हुए। हेमवंती नंदन गढ़वाल विवि को एक लाख 10 हजार 500 रुपये दस्तावेजों के सत्यापन के लिए भेजा। शेष संस्थानों में रुपये भेजने के पहले ही पांच लाख 75 हजार 730 रुपये लैप्स हो गए। ऐसे में करीब आठ हजार दस्तावेजों का सत्यापन कार्य फिर से स्थगित हो चुका है।

जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक अशोक कुमार सिंह ने बताया क‍ि ड्राफ्ट के माध्यम से संबंधित विवि एवं संस्थान को रुपये भेजने थे, लेकिन अकाउंट में भेजने के निर्देश मिलने पर संबंधित सभी विवि एवं संस्थानों के खाता विवरण न होने से रुपये लैप्स हो गए। गढ़वाल विवि का अकाउंट डिटेल मिल सका था, इसलिए एक लाख 10 हजार 500 रुपये भेज दिया गया है।

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