बलियानाला : 15 करोड़ बहे, 41 करोड़ का काम बारिश में बंद

किशोर जोशी, नैनीताल: अतिसंवेदनशील बलियानाला में ब्रिटिशकाल से ही भूस्खलन होता रहा है। बलियानाला ट्रीटमेंट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी सरकार में 15 करोड़ से अधिक का बजट जारी किया गया था। इससे बलियानाला का जो ट्रीटमेंट किया गया, वह सभी बारिश में बह गया। इधर, सिंचाई विभाग की ओर से बलियानाला में 41 करोड़ का काम किया जा रहा है। मगर बारिश की वजह से इन दिनों काम ठप है। सोमवार को जब विधायक ने प्रभावित परिवारों को लेकर प्रशासन के रवैये के खिलाफ धरना दिया तो एडीएम हरवीर सिंह ने बताया कि प्रभावितों को रूसी बाइपास में 5.7 एकड़ में प्रस्तावित आवासीय योजना में भवन आवंटित करने पर विचार किया जाएगा। इधर, बलियानाला में भारी भूस्खलन के बाद भी पालिका ईओ रोहिताश शर्मा की गैरमौजूदगी खासी चर्चा में रही। डीएम ने इसको लेकर नाराजगी भी प्रकट की। 1898 में भूस्खलन में गई थी 28 की जान बलियानाला ब्रिटिशराज से ही संवेदनशील रहा है। जोन चार में स्थित बलियानाला से थ्रस्ट भी गुजरता है। बलियानाला में 17 अगस्त 1898 को हुए भारी भूस्खलन की चपेट में आने से 27 भारतीय व एक ब्रिटिश नागरिक की मौत हुई थी। 1934-35, 1972, 2004, दस सितंबर 2014 व 12 सितंबर 2017 को भी भारी भूस्खलन हुआ था। वहीं बलियानाला में दरारों की वजह से हरिनगर व रईस होटल क्षेत्र के तमाम मकान झुक गए हैं। कृष्णापुर जाने वाला रास्ता भी भूस्खलन की चपेट में आ गया था। तब से इलाके के लोग चौपहिया वाहन से ज्योलीकोट होते हुए नैनीताल आते हैं। पूर्व सभासद डीएन भट्ट के अनुसार 2001 में विशेषज्ञों के सुझावों का समावेश करते हुए बलियानाला ट्रीटमेंट की कार्ययोजना बनी। 15 करोड़ 52 लाख के निर्माण कार्य हुए मगर दस साल बाद लगाया गया एक भी पत्थर नहीं बचा है। कहा कि तब से आज तक बलियानाला में 30 मीटर से अधिक कटाव हो गया है। 15 अक्टूबर 2000 को बलियानाला प्रभावित क्षेत्र संघर्ष समिति ने तत्कालीन सीएम एनडी तिवारी को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें सिंचाई विभाग द्वारा किए गए कार्यो की जांच की मांग की गई थी। बलियानाला पर टिका है नैनीताल का अस्तित्व अतिसंवेदनशील बलियानाला पर नैनीताल का अस्तित्व टिका है। हल्द्वानी रोड, भवाली रोड के अलावा रईस होटल क्षेत्र तल्लीताल, कृष्णापुर आदि की हजारों की आबादी बनियानाला के आसपास रहती है। बलियानाला का ट्रीटमेंट नहीं किया गया तो शहर के अस्तित्व को लेकर चिंता बढ़ना तय है। भू विज्ञानी प्रो. सीसी पंत दैनिक जागरण से बातचीत में साफ कर चुके हैं कि यह कच्ची पहाड़ी भुरभुरी है।

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