Kargil Vijay Diwas 2021 : लांसनायक मोहन सिंह ने पत्‍नी से कहा था, फौज के साथ मिशन पर जा रहा हूं, चिट्ठी भेजूंगा...

Kargil Vijay Diwas 2021 23 अप्रैल 1999 को नागा रेजीमेंट सेकेंड में लांसनायक पति मोहन सिंह ड्यूटी के लिए लौट गए थे। शहादत से 16 दिन पहले फोन पर बात होने पर बताया था कि टास्क मिलने के कारण फौज के संग जा रहा हूं।

Skand ShuklaMon, 26 Jul 2021 07:31 AM (IST)
Kargil Vijay Diwas 2021 :लांसनायक मोहन सिंह ने पत्‍नी से कहा था, फौज के साथ मिशन पर जा रहा हूं

गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी : परिवार संग 20 दिनों की छुट्टी बिताने के बाद 23 अप्रैल 1999 को नागा रेजीमेंट सेकेंड में लांसनायक पति मोहन सिंह ड्यूटी के लिए लौट गए थे। शहादत से 16 दिन पहले फोन पर बात होने पर बताया था कि टास्क मिलने के कारण फौज के संग जा रहा हूं। कुछ दिन फोन करना मुश्किल रहेगा। इसलिए चिट्ठी भेजूंगा। मुझे जरा भी अहसास नहीं था कि उनके और मेरे बीच यह आखिरी बातचीत होगी। कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लड़ते हुए सात जुलाई की सुबह वह देश के लिए कुर्बान हो गए। मगर शहादत की जानकारी छह दिन बाद मिली। जागरण से फोन पर बातचीत के दौरान पति से जुड़ी यादों को बयां करते हुए वीरनारी उमा देवी भावुक हो गईं।

मूल रूप से बागेश्वर के पोस्ट कर्मी निवासी लांसनायक मोहन सिंह महज 29 साल की उम्र में देश के लिए शहीद हो गए थे। वर्तमान में नवाबी रोड पर परिवार संग रहने वाली उमा उस समय रानीखेत में एमईएस क्वाटर में रहती थी। पति की शहादत के दौरान बड़ी बेटी रंजना छह साल, छोटी बेटी मिताली चार और बेटा प्रहलाद महज 18 माह का था। 26 साल की उम्र में पति का साथ छूटने के बावजूद उमा ने हिम्मत नहीं हारी। 2001 में वह बच्चों संग हल्द्वानी आ गई। रंजना की शादी हो चुकी है। बेटी मिताली ने एम-फार्मा और बेटे प्रहलाद ने बीबीए की डिग्री हासिल की है। वहीं, अदम्य साहस के लिए शहीद मोहन सिंह को सेना मेडल दिया गया था। वह अपनी टुकड़ी के उन 25 जवानों में शामिल थे। जिन्हें कारगिल युद्ध में दुश्मनों को खदेडऩे के लिए भेजा गया था।

उमा ने बुरे दौर से जीती जंग

पति की मौत के बाद उमा के सामने कई तरह की परेशानियां पैदा होने लगी। लेकिन हर बुरे दौर को पछाड़ उसने साबित किया कि वह वाकई में वीरनारी है। सरकार और सेना से भी पूरा सहयोग मिला। एक शहीद की पत्नी होने पर उसे गर्व हैं। उमा के छोटे भाई महेंद्र अधिकारी भाजपा के वरिष्ठ नेता व हल्द्वानी नगर पालिका के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं।

उत्तराखंड के 75 जवान हुए थे शहीद

पूर्व जिला सोल्जर बोर्ड अधिकारी मेजर बीएस रौतेला ने बताया कि कारगिल युद्ध में उत्तराखंड के 75 जवानों ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे। कई युद्ध घायल भी हैं। नैनीताल जिले से पांच लोगों ने शहादत दी थी। जिसमें मेजर राजेश अधिकारी (महावीर चक्र), लांसनायक मोहन सिंह (सेना मेडल), लांस नायक चंदन सिंह (सेना मेडल), लांस नायक राम प्रसाद ध्यानी व सिपाही मोहन चंद्रा शामिल थे।

शहीद का बेटा भी देश रक्षा में जुटा

मूल रूप से पौड़ी की धूमाकोट तहसील के ग्राम डांडा तोली निवासी शहीद लांस नायक राम प्रसाद ध्यानी का परिवार वर्तमान में रामनगर के पीरूमदारा में रहता है। मेजर बीएस रौतेला के मुताबिक 13 सिख रेजीमेंट में पोस्टेड ध्यानी 25 जुलाई 1999 को शहीद हुए थे। मगर उससे पहले दो पाकिस्तानियों को मार गिराया था। शहीद का बड़ा बेटा अंकित खेतीबाड़ी का काम करता है। जबकि छोटे अजय ने पिता के कदमों में चलते हुए सेना ज्वाइन की। वह पांच गढ़वाल राइफल्स में तैनात है।

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