Ranibagh Bridge : बार‍िश मेंं मलबा ग‍िरने से मजदूरों की जान का खतरा, मुश्किल है 23 जुलाई तक काम पूरा होना

Ranibagh Bridge रानीबाग पुल से सटी सड़क के टूटने के बाद अब मरम्मत में जुटे मजदूरों के लिए खतरा पैदा हो गया है। बारिश के कारण भूस्खलन की स्थिति बन रही है। ऐसे में 23 जुलाई तक आठ मीटर सुरक्षा दीवार को तैयार करना असंभव लग रहा है।

Prashant MishraThu, 22 Jul 2021 07:05 AM (IST)
मिट्टी के साथ छोटे पत्थर भी टूट कर गिर रहे हैं।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : Ranibagh Bridge : कुमाऊं के लिए अहम माने जाने वाले रानीबाग पुल से सटी सड़क के टूटने के बाद अब मरम्मत में जुटे मजदूरों के लिए खतरा पैदा हो गया है। बारिश के कारण भूस्खलन की स्थिति बन रही है। मिट्टी के साथ छोटे पत्थर भी टूट कर गिर रहे हैं। ऐसे में 23 जुलाई तक आठ मीटर सुरक्षा दीवार को तैयार करना लोक निर्माण विभाग के लिए अब चुनौती नहीं, बल्कि असंभव लग रहा है। अगर आज भी बारिश का दौर जारी रहा तो काम और प्रभावित हो जाएगा। बुधवार को पूरे दिन मजदूर बारिश में भीगते हुए काम कर रहे थे। कीचड़ के साथ नदी का कटाव भी हो रहा है।

रानीबाग पुल की दस फीट चौड़ी सड़क सोमवार सुबह बारिश से हुए भूस्खलन से ध्वस्त हो गई थी। पिछले तीन दिन से यह सड़क वाहनों के लिए बंद हो चुकी है। सिर्फ दोपहिया वाहनों को निकलने की अनुमति दी गई है। लोनिवि हल्द्वानी खंड के इंजीनियर केके पाठक की निगरानी में मरम्मत का काम किया जा रहा है। आठ मीटर ऊंची सुरक्षा दीवार बनने के बाद ही आगे का काम किया जाएगा। सोमवार रात 12 बजे तक मजदूर यहां काम पर जुटे थे। लेकिन बुधवार सुबह से लगातार हो रही बारिश ने खलल डाल दिया। कई बार पत्थर व मिट्टी गिरने से हादसे का डर भी बना हुआ है। पानी रोकने के लिए आधा दर्जन से अधिक बड़ी तिरपाल लगाई गई है। लेकिन सड़क जिस हिस्से से धराशायी हुई है वह पानी पडऩे से अब और कमजोर होने में लगी है। इसलिए काम करना मुश्किल हो गया।

काम से ज्यादा हटो-बचो

बरसात के कारण निर्माण स्थल के आसपास कीचड़ ही कीचड़ हो गया है। पहाड़ी पर बचे बोल्डर व छोटे पत्थर मिट्टी की पकड़ कमजोर होने से गिरने की कगार पर है। जहां श्रमिक काम पर लगे हैं। वहीं, एक व्यक्ति पहाड़ी की निगरानी में लगा है। ताकि भूस्खलन पर नजर रखी जा सके।

प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल के नवीन वर्मा का कहना है कि नए पुल के पिलर बनाने का काम नौ माह बाद भी पूरा नहीं हो सका। सुस्त गति से काम करने पर निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि, लापरवाही का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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