International Yog Day 2021 : ध्यान के अभ्यास से बच्चों में बढ़ाएं एकाग्रता, हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी योग का नियमित अभ्यास

International Yog Day 2021 तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बच्चों की इम्यूनिटी और एकाग्रता बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए नियमित योगाभ्यास आवश्यक है। यह सलाह आयुष योग केंद्र की योग विशेषज्ञ पाला मेहता ने दी है।

Prashant MishraMon, 21 Jun 2021 08:08 AM (IST)
ध्यान रहे अपनी क्षमता के अनुसार ही कुंभक करना चाहिए।

जागरण संवाददाता, हल्द्वानी : International Yog Day 2021 : कोरोना में योग के महत्व से हर कोई वाकिफ हो गया है। जागरूकता भी बढ़ी है। तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में बच्चों की इम्यूनिटी और एकाग्रता बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए नियमित योगाभ्यास आवश्यक है। यह सलाह आयुष योग केंद्र की योग विशेषज्ञ पाला मेहता ने दी है। वह रविवार को दैनिक जागरण के हैलो डाक्टर में परामर्श दे रही थी।

सवाल- किस उम्र में योग करना चाहिए?

लक्ष्मण सिंह जग्गी बिंदुखत्ता, दीप्ति जोशी अल्मोड़ा

जवाब- पांच साल से 90 साल की उम्र तक योग किया जा सकता है। रोटी-कपड़ा-मकान की तरह योग को जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लेना चाहए।

सवाल- योग किस तरह करना चाहिए? बीमारी की स्थिति में भी योग किया जा सकता है।

सरिता शाह, नैनीताल, मनोज सिंह, रुद्रपुर

जवाब- योग के सकारात्मक असर होने के साथ ही नकारात्मक असर भी हो सकते हैं। सर्जरी हुई है या फिर कोई अन्य बीमारी है तो योग विशेषज्ञ के परामर्श के अनुसार ही योगाभ्यास करना उचित रहेगा।

सवाल- योग करने पर दवाइयां छोड़ देनी चाहिए?

गोविंद मेहरा हल्द्वानी, सुनयना जोशी भीमताल

जवाब- योग का अभ्यास नियमित करें, लेकिन दवाइयां लेने व छोडऩे से पहले डाक्टर से ही परामर्श करें। खुद दवाइयां छोडऩा ठीक नहीं।

सवाल- कुंभक प्राणायाम कब करना चाहिए? क्या यह अभ्यास कोरोना मरीजों के लिए ठीक है?

वीक राठौर हल्द्वानी, पवन पांडे गदरपुर, सोनी बिष्ट खटीमा

जवाब- सांस रोकने की प्रक्रिया को कुंभक कहा जाता है। इसका अभ्यास सुबह-शाम खाली पेट करना ठीक है। इस अभ्यास को बार-बार नहीं करना चाहिए। फेफेड़ों की मजबूती के लिए यह अभ्यास ठीक है। ध्यान रहे कि अपनी क्षमता के अनुसार ही कुंभक करना चाहिए।

इसलिए जरूरी है योगाभ्यास

- तन-मन को स्वस्थ रखने के लिए

- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए

- एकाग्रता बढ़ाने के लिए

- सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने के लिए

- आध्यात्मिक दृष्टि विकसित करने के लिए

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