कोरोनाकाल में चीड़ ने संभाल दी अर्थव्यवस्था, लीसे से मिला 7.53 करोड़ रुपये राजस्व

संकट के इस दौर में 2238 श्रमिक रोजगार से जुड़े रहे।

अम्लीय प्रवृत्ति की वजह से यह आसपास की भूमि को बंजर भी बना देता है। मगर यही बेकाम के समझे जाने वाले चीड़ के पेड़ों ने कोरोनाकाल में अल्मोड़ा वन प्रभाग से ही सरकार को 7.53 करोड़ रुपये का अच्छा खासा राजस्व दिया है।

Prashant MishraTue, 09 Feb 2021 09:05 PM (IST)

जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा : उत्तराखंड के 65 फीसद भू भाग में फैला चीड़ बेकाम का माना जाता है। अत्यधिक ज्वलनशील होने से इसे वनाग्नि का जनक कहा जाता है। वहीं अम्लीय प्रवृत्ति की वजह से यह आसपास की भूमि को बंजर भी बना देता है। मगर यही बेकाम के समझे जाने वाले चीड़ के पेड़ों ने कोरोनाकाल में अल्मोड़ा वन प्रभाग से ही सरकार को 7.53 करोड़ रुपये का अच्छा खासा राजस्व दिया है। वहीं वन पंचायतों व लीसा कारोबारियों को भुगतान करने के बाद अबकी 478 स्थानीय ग्रामीणों को स्वरोजगार से भी जोड़ा जाएगा। 

पर्वतीय क्षेत्रों में वैश्विक महासंकट को अवसर में बदलने के लिए चीड़ बहूल वन क्षेत्रों में लीसा ने स्वरोजगार की नई उम्मीद जगाई है।

वहीं राजस्व घाटे की भरपाई में यह उद्योग सहायक बन रहा है। बीते वर्ष कोरोना की दस्तक के साथ ही वन क्षेत्रों में लीसा उत्पादन के लिए पेड़ तैयार कर लिए गए थे। लाकडाउन से लेकर मौजूदा कोरोनाकाल तक तैयार लीसे ने राज्य की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को सहारा जैसा दिया है। वहीं संकट के इस दौर में 2238 श्रमिक रोजगार से जुड़े रहे। 

555 वन पंचायतों को भी राहत 

राजस्व कोष में 7.53 करोड़ रुपये जमा करने के बाद विभाग 555 वन पंचायतों को वर्ष 2015 करीब 2.62 करोड़ का भुगतान करने जा रहा है। विभाग ने सभी सरपंचों से बैंक खाता, आधार व पेनकार्ड की प्रति मांगी है ताकि रायल्टी का भुगतान खातों में किया जा सके। इस राशि से पहाड़ की वन पंचायतों में पौधरोपण, जल संरक्षण आदि कार्य शुरू किए जा सकेंगे। वहीं नापभूमि से उत्पादित लीसे का 18.53 लाख तथा इससे जुड़े सेवकों को 14.76 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। 

कहां कितना उत्पादन 

अल्मोड़ा वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्र से इस सीजन में 4519.557 कुंतल, सिविल व पंचायत से 9282.913 व नापभूमि से 11404.580 यानी तीनों क्षेत्रों से 25207.05 कुंतल लीसे का उत्पादन हुआ। कोरोना संक्रमण से कुछ राहत व नेपाली मजदूरों की आमद के मद्देनजर चालू सीजन में उत्पादन दोगुना होने की उम्मीद है। 

डीएफओ महातिम सिंह ने बताया कि लाकडाउन की वजह से नेपाली श्रमिक नहीं आ सके। ऐसे में उत्पादन 25 हजार कुंतल रहा। इस सीजन में श्रमिकों की कमी नहीं रहेगी। इस बार लीसे की मात्रा दोगुना बढ़ेगी। 478 नए स्थानीय ग्रामीणों को भी स्वरोजगार देने जा रहे। 

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