स्टोन क्रशर के मामले में हाईकोर्ट ने डीएम को दिया एक माह में समस्या निस्तारण का आदेश

कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद जिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिए है कि एक माह के भीतर याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपो का निस्तारण करें। वरिष्ठ न्यायमूर्ति संजय मिश्रा व न्यायमुर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दी।

Prashant MishraWed, 01 Dec 2021 03:43 PM (IST)
अवैध खनन को रोकने के लिए उच्च न्यायलय में जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।

जागरण संवाददाता, नैनीताल। उच्च न्यायालय ने नैनीताल व ऊधमसिंह नगर में पीसीबी के मानकों के खिलाफ चल रहे ओमकार स्टोन क्रशर, दाबका स्टोन क्रशर व एलएसएससी स्टोन क्रशर के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद जिलाधिकारी नैनीताल को निर्देश दिए है कि एक माह के भीतर याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपो का निस्तारण करें। वरिष्ठ न्यायमूर्ति संजय मिश्रा व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने जनहित याचिका को निस्तारित कर दी।

ग्राम गजरौला बाजपुर निवासी हरकेश सिंह ने जनहित याचिका दायर कर कहा है कि बैलपड़ाव तहसील कालाढूंगी क्षेत्र में खेतों को समतल करने के लिए दो फिट खोदने की परमिशन सरकार द्वारा दी गयी थी, जिसकी  आड़ में ग्रामीणों और स्टोन क्रेशरों की मिलीभगत से 80 एकड़ में फैले खेतों को 40-40 फिट गहरा खोद कर अवैध खनन किया जा रहा है ,जिसे बाजपुर व अन्य स्टोन क्रेशरों को बेजा जा रहा है। खुदान से आसपास स्कूल सहित कृषि भूमि को नुकसान पहुच रहा है। याचिकाकर्ता ने इसमे रोक लगाने और अवैध खनन करने वालो के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग की है। अवैध खनन से सरकार को करोड़ो रूपये के राजस्व का नुकसान भी हुआ है।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना है कि उन्होंने इस सम्बंध में जिलाधिकारी नैनीताल, तहसीलदार कालाढूंगी, जिला अधिकारी उधमसिंह नगर, राज्य सरकार ,पीसीबी को प्रत्यावेदन भी दिया परन्तु उनके प्रत्यावेदन पर कोई कार्यवाही नही हुई। इस अवैध खनन को रोकने के लिए उच्च न्यायलय में जनहित याचिका दायर करनी पड़ी।

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