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कोरोना के चक्कर में घर बना मेडिकल स्टोर, बाजार में जरूरतमंदों को नहीं मिल रही दवा

घरों पर ऑक्सीजन सिलिंडर स्टोर करने की बात सुनने में आ रही है, ऐसा करना बिलकुल भी उचित नहीं है।

सीनियर फिजिशियन डा. रवि सिंघल बताते हैं कि कोरोनाकाल चल रहा है। ऐसे में अगर कोई एक-दो खुराक दवा घर पर रख लेता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन ज्यादा दवाई घर पर स्टोर नहीं करनी चाहिए।

Prashant MishraThu, 06 May 2021 04:27 PM (IST)

श्याम मिश्रा, काशीपुर। कोरोना के असर से लोगों ने घरों में दवाइयों का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। जरूरी दवाएं, बीपी मशीन, थर्मामीटर, पल्स ऑक्सीमीटर आदि जुटाना शुरू कर दिया है। तमाम लोगों ने कोई बीमारी न होते हुए भविष्य को देखते हुए दवाई और मेडिकल इक्कुपमेंट खरीद कर रख लिए हैं। जिन गली-मोहल्लों में लोग पॉजिटिव निकले हैं वहां रहने वाले कई लोग खुद ही होम क्वारंटाइन में चले गए हैं। कुछ कोरोना के मरीजों के अपना इलाज खुद ही घर पर शुरू कर दिया है। बीते एक सप्ताह के दौरान कोरोना मरीजों की संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। कई अस्पतालों ने तो मरीजों का इलाज ही बंद कर दिया है।

नगर में कोरोना से मौतें होने की सूचना लगातार आ रही है। ऐसे में तमाम लोग घर को ही अस्पताल बनाने में जुटे हुए हैं। जिनके घर में कोई बीमार नहीं है वह भी दवा व अन्य उपकरण खरीद रहे हैं। सीनियर फिजिशियन डा. रवि सिंघल बताते हैं कि कोरोनाकाल चल रहा है। ऐसे में अगर कोई एक-दो खुराक दवा घर पर रख लेता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन ज्यादा दवाई घर पर स्टोर नहीं करनी चाहिए। ज्यादा दवाई स्टोर करना व्यर्थ का कार्य साबित हो सकता है। उन्होंने बताया कि घरों पर ऑक्सीजन सिलिंडर स्टोर करने की बात सुनने में आ रही है, जबकि ऐसा करना बिलकुल भी उचित नहीं है।

केस -एक

मुरादाबाद रोड निवासी एक व्यापारी की मौत के बाद उनके एक दोस्त ने घर में कोई बीमार ना होने के बाद भी पल्स ऑक्सीमीटर, बीपी मशीन, थर्मामीटर, बुखार की दवा आदि का भंडारण कर लिया है। उनका कहना है कि यह सब उन्होंने आपात स्थिति के लिए किया है। शहर के कई अस्पताल मरीजों को ऑक्सीजन साथ लाने के लिए कह रहे हैं। लिहाजा किसी भी संभावित दिक्कत से बचने के लिए उन्होंने ऐसा किया।

केस दो

गड्ढा कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने फेमी फ्लू टेबलेट, विटामिन सी और जिंक की दवाइयों का स्टोर परिवार के सदस्यों की संख्या के हिसाब से कर लिया है। बीपी मशीन और तीन पल्स ऑक्सीमीटर भी खरीद लिए हैं। भाप लेने के लिए मशीन भी ले ली है। उनके घर में इस समय कोई बीमार नहीं है। इसके बाद भी उन्होंने सारी व्यवस्थाएं कर ली है।

केस-तीन

पुष्पक बिहार कालोनी निवासी एक समाज सेवी के दोस्त का बीते दिनों दिल्ली में कोरोना से निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने अपने घर में सर्दी, जुकाम, खांसी बुखार आदि की दवाईयों को स्टोर करना शुरू कर दिया है। हालांकि अभी तक उनके घर में कोई बीमार नहीं है। बस सावधानी के तौर पर उन्होंने ऐसा किया है।

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