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हरदा बोले-गैरसैण को पहाड़ से नहीं बल्कि नई संभावनाओं से जोड़कर देखता हूं

हरदा बोले-गैरसैण को पहाड़ से नहीं बल्कि नई संभावनाओं से जोड़कर देखता हूं
Publish Date:Mon, 10 Aug 2020 04:28 PM (IST) Author: Skand Shukla

बागेश्वर, जेएनएन : चुनावी मोड में आ चुके पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि गैरसैण को पहाड़ से नही बल्कि नई संभावनाओं से जोड़कर देखता हूं। इसमें कोई राजनीति नही। भाजपा सरकार पर हमलावर होते हुए कहा कि साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरी तरह असफल साबित हुआ है।

 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पत्रकार वार्ता में कहा कि गैरसैण राजधानी से नए अवसर पैदा होंगे। मैदानी इलाकों में अब जगह नही बची। पहाड़ में बागवानी, पर्यटन, कृषि क्षेत्र में काफी संभावनाएं है। खाली ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा से कुछ नही होता हैं। नए अवसरों से लोगों को जोड़ना होगा। स्थानीय उत्पादों पर लोगों ने काम कर सरकार को आइना दिखाया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क के हालात बहुत खराब है। पहाड़ की यही लाइफ लाइन है। अब आप अंदाज लगा सकते है अगर इसका यह हाल है तो क्या प्रदेश में क्या हो रहा होगा। कोई ध्यान नही दे रहा है। महामारी के बाद भी सरकार सोई हुई है। भाजपा ने नई थ्योरी इजाद की है। करो कम कहो ज्यादा।

 

श्री रावत ने कहा कि बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर युवक कांग्रेस ने जन जागृति अभियान छेड़ा हुआ है। 18 हजार सृजिद पदों को सरकार ने खत्म कर दिया है। रोजगार की दर में रिकार्ड 32 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। बेरोजगारों के हकों के लिए एक दिन का उपवास रखने का भी कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना नारा है या कार्यक्रम स्पष्ट होना चाहिए। धरातल में कुछ नही दिख रहा है। महामारी में स्वास्थ्य सुविधाएं सबसे खराब हालात में है। हमारे समय में भी उतनी स्थिति ठीक नही है। अब तो हालात और बदतर हो गए है।

पूर्व सीएम ने कहा कि नोटबंदी के बाद कोरोना प्रबंधन घोटाला सबसे बड़ा घोटाला बनकर सामने आएगा। आपदा कार्यों के लिए आया पैसा कार्यकर्ताओं को बांटा जा रहा है। नोटबंदी के बाद आए पैसों से आज हर जिले में करोड़ों की लागत के कार्यालय खोले जा रहे है। कांग्रेस के मित्र विपक्ष के रुप में कार्य करने के जवाब में उन्होंने कहा कि मित्रवत व्यवहार रखना चाहिए पर कर्म भी जरुरी है। इस अवसर पर सांसद प्रदीप टम्टा, ललित फसर्वाण, राजेंद्र टंगड़िया, बालकृष्ण, हरीश ऐठानी, सज्जन लाल टम्टा, गीता रावल, धीरज कोरंगा, बबलू नेगी, सूरज प्रहरी, लोकमणि पाठक, राजेंद्र बाराकोटी, रंजीत दास, सुनीता टम्टा, दर्शन कठायत, भीम कुमार, ईश्वर पांडे सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

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