पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुंजवाल ने कहा, मंडियां खत्म कर उद्योगपतियों को लाभ की साजिश कर रही सरकार

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक जागेश्वर गोविंद सिंह कुंजवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत की।
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 03:53 PM (IST) Author: Skand Shukla

अल्मोड़ा, जेएनएन : कृषि विधेयकों से मंडियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। हजारों लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। जब मंडियां ही नहीं रहेंगी तो न्यूनतम समर्थन मूल्य भी तय नहीं होगा। यह अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने की तरकीब मात्र है, जिसका नुकसान किसानों को ही होगा। कांट्रेक्ट फार्मिंग की आड़ में काश्तकारों को उन्हीं की जमीन से बेदखल करने की साजिश है। अगर विधेयक लाभकारी होता तो देशभर का किसान आंदोलित न होता।

यह बात पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं विधायक जागेश्वर गोविंद सिंह कुंजवाल ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने संसद से पास तीनों विधेयकों को किसानहितों के खिलाफ करार दिया। तंज कसा कि केंद्र सरकार उद्योगपतियों का रास्ता साफ करने में जुटी है। अध्यादेश लाने से पूर्व सरकार ने सदन में बिल पर चर्चा करानी चाहिए थी। उन्होंने विधेयकों को मंडी व्यवस्था खत्म करने की साजिश बताया।

कुंजवाल ने कहा कि ये इतने महत्वपूर्ण कानून नहीं थे कि अध्यादेश के तहत लाया जाय। आवश्यक वस्तु अधिनयम में संग्रह की छूट दी गई है। अंदेशा जताया कि अब सस्ता गल्ला विक्रेता प्रणाली को भी समाप्त करने की तैयारी है। उन्होंने आगे कहा कि देंश में कृषि सुधार की जरूरत है। खेती लाइसेंस मुक्त होनी चाहिए।

श्रम संबंधी बिल से उत्तराखंड को ज्यादा नुकसान

कुंजवाल ने श्रम कानून के तहत लाए गए बिल को भी श्रमिक विरोधी बताया। कहा कि बिल के अनुसार किसी भी फैक्ट्री में कार्यरत 300 कर्मचारियों को मालिक बगैर कुछ कहे हटा सकता है। इस बिल से सबसे ज्यादा नुकसान उत्तराखंड उठाएगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कृषि विधेयकों का पुरजोर विरोध करेगी। इस मौके पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष पीतांबर पांडे, नगर अध्यक्ष पूरन सिंह रौतैला, महिला इकाइ जिलाध्यक्ष लता तिवारी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ताराचंद्र जोशी, राजीव कर्नाटक, शेखर पांडे, रमेश बिष्ट, भैरव दत्त, मनोज रावत आदि मौजूद रहे।

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