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गौरीशंकर ने जंगलों से जोड़ लिया नाता

जेएनएन नैनीताल/भीमताल :

पर्यावरण संरक्षण के लिए गौरीशंकर राणा का सपना भी है और जुनून भी। यही वजह है कि बीते 20 वर्षो में गौरीशंकर अपने साथियों के साथ मिलकर लाखों पौधे रोप चुके हैं

निकटवर्ती सातताल में गौरीशंकर राणा को प्रकृति और जंगलों के बीच रहना और वनों के संरक्षण में खास दिलचस्पी है। हर वर्ष बरसात शुरू होते ही वह अपने साथियों के साथ पौधा एकत्रित करने में जुट जाते हैं। जिसके बाद उन्हें रोपने का सिलसिला शुरू होता है। बरसात में तीन माह तक दोस्तों के साथ मिलकर हजारों पौधे रोपते हैं। राणा ठंड में बीज लगाकर नए पौधे भी तैयार करते हैं। गर्मियों में जंगलों को आग से बचाने में भी मदद करते हैं। उनके इस अभियान में सातताल आश्रम के प्रबंधक विजय पाटनी, युनुस, सुमित कार्की, कुंदन महरा, हेमंत आर्या व हिम्मत गुरंग भी सहयोग प्रदान करते हैं।

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20 साल पहले शुरू किया जंगल कैंप

इसे गौरी का जंगलों से जुड़ाव कहें या जुनून उन्होंने कारोबार भी जंगल से जुड़ा हुआ ही चुना। करीब 20 साल पहले उन्होंने सातताल में जंगलों के बीच जंगल कैंप शुरू किया। पर्यटन व्यवसाय के मानक और तौर तरीके बदले लेकिन गौरी ने जंगलों के संरक्षण के साथ कोई समझौता नहीं किया। आज भी वह बिना बिजली और अन्य सुविधाओं के कैंप चला रहे हैं। पर्यटकों को यहां टेंट में रात गुजारनी पड़ती है और वनस्पतिया, जंगली जानवर, पक्षियों के दीदार और उनसे जुड़ी जानकारियों से रूबरू होने का मौका मिलता है।

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इस वर्ष दस हजार पौधे रोपने का है लक्ष्य

राणा ने बताया कि इस वर्ष दस हजार पौधा रोपने का लक्ष्य रखा गया है। कुछ पौधे तो वन विभाग देता है, लेकिन अधिकतर खरीदने पड़ते हैं। जिसके लिए दोस्त और कुछ परिचित भी आर्थिक सहायता करते हैं, बाकी वह खुद जुटाते हैं। अब तक करीब दो हजार पौधे एकत्रित कर चुके हैं। विभिन्न प्रजातियों के करीब दो हजार पौधे उन्होंने घर पर खुद तैयार किए हैं। 15 जुलाई तक पौधे एकत्रित करने के बाद उन्हें रोपने की मुहिम शुरू की जाएगी। बांज, रियाज, देवदार, पागर जैसे पौधों के बीच कटीले और झाडि़यों वाले पौधा रोपना भी अहम है। यह झाडि़यां रोपे गए पौधों को जंगली जानवरों से संरक्षण प्रदान करती है,ं वहीं पक्षियों के रहने के लिए भी यह उपयुक्त हैं।

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