दहेज उत्पीड़न मामले में दोषी पति को पांच साल कठोर कारावास, पांच हजार अर्थदंड भी लगाया

आरोपति पति हरीश जोशी पुत्र लीलाधर जोशी निवासी- सुभाष नगर बिन्दुखत्ता लालकुआ को दोषी ठहराते हुए पांच साल कठोर कारावास व पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के बाद दोषी पति को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया।

Prashant MishraWed, 01 Dec 2021 02:49 PM (IST)
अर्थदण्ड अदा ना करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतान होगा।

जागरण संवाददाता, नैनीताल। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश राकेश कुमार सिंह की कोर्ट ने पत्नी को दहेज के लिए उत्पीड़न करने के आरोपति पति  हरीश जोशी पुत्र लीलाधर जोशी निवासी- सुभाष नगर बिन्दुखत्ता लालकुआ को दोषी ठहराते हुए पांच साल कठोर कारावास व पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत के आदेश के बाद दोषी पति को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। अर्थदण्ड अदा ना करने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतान होगा।

डीजीसी फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने अदालत को बताया कि 13 सितंबर 2016 को मृतका  हेमा देवी के भाई माधवानन्द पलड़िया निवासी  ग्राम पिनरौ, पिनसेला, तहसील व जिला नैनीताल ने थाना लालकुआ में  अभियुक्त हरीश चन्द्र जोशी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराई। कहा कि उसकी बहिन हेमा की शादी  27 नवंबर 2007 को हरीश चन्द्र पुत्र लीलाधर निवासी सुभाष नगर बिंदुखत्ता के साथ सम्पन्न हुई थी। शादी में सामर्थ्यानुसार दान दहेज दिया था लेकिन दहेज से पति खुश नहीं था। 

12 सितंबर 2016 की सुबह 8 बजे  बहिन से फोन पर वार्ता हुई तो उसका पति उसके साथ मारपीट कर गालीगलौज कर रहा है। धमकी दे रहा है कि तुझे आज जान से मार देंगे,  शादी को 9 साल हो गये हैं, दहेज का मुकदमा भी दर्ज नहीं होगा। अपनी बहिन को फोन पर समझाया कि तू डर मत में दिन में तेरे पास आऊंगा तेरी सास व पति को समझाउंगा, तभी दिन में 1:30 बजे ससुराल से फोन आया कि तुम्हारी बहन को आग लगा दी है, लालकुआ आया।  रास्ते में एम्बुलेंस से बहन को लाया जा रहा था, उसे रुकवाया। बहन से बात की तो बताया कि मेरे पति ने तेल छिड़कर कर आग लगा दी। अस्पताल लाये फिर बृजलाल अस्पताल ले गये। बहिन के पति व सास से कहा कि डॉक्टर कह रहे है कि राममूर्ति ले जाओ। राममूर्ति ले जाते समय उसकी मृत्यु हो गयी।

अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी करते हुए अभियोजन तथ्यों की पुष्टि के लिए 15 गवाह पेश किये। मामले की मुख्य साक्षी मृतका की बेटी खुशी जोशी व पुत्र हर्षित द्वारा न्यायालय में अभियोजन तथ्यों का समर्थन नहीं किया और उन्हें पक्षद्रोही घोषित किया गया। पुत्र द्वारा बयान दिया गया कि माता की बीड़ी पीते समय आग लग गयी थी। 

दोनों साक्षी जो मामले के महत्वपूर्ण साक्षी थे, घटना के उपरान्त अभियुक्त की माता के संरक्षण में रह रहे थे और प्रभाव में आकर अभियोजन तथ्यों का समर्थन नहीं किया गया। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी पाया कि अभियुक्त हरीश जोशी द्वारा ही अपनी पत्नी हेमा को अतिरिक्त दहेज की मांग के कारण आये दिन तंग व परेशान व मारपीट की जाती थी। जिस कारण मृतका द्वारा ससुराल में आत्महत्या कर अपनी जान दी है। जिसकी जिम्मेदारी पूर्ण रूप से पति की ही मानी जाती है। न्यायालय द्वारा अपने निर्णय में विधि विज्ञान प्रयोगशाला रूद्रपुर द्वारा विधि विज्ञान प्रयोगशाला, जो माल काफी समय बाद परीक्षण हेतु भेजा गया था। संदेहास्पद रिपोर्ट दी।

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