खतौनी पर तोला जा रहा धान, किसानों का आरोप खतौनियों का हो रहा गलत इस्तेमाल

मंडी में किसानों ने इस तरह के आरोप लगाकर सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिये है। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से उनका धान नही तोला जा रहा है। जबकि मिलीभगत कर धान खरीद में अन्य फसलों की खतौनियां दर्शायी जा रही है।

Prashant MishraMon, 08 Nov 2021 05:56 PM (IST)
बाहरी क्षेत्र से आये अनाज माफिया का धान तत्काल तोला जा रहा है।

अविनाश श्रीवास्तव, सितारगंज : धान खरीद में खतौनियों का गलत इस्तेमाल हो रहा है। अनाज माफिया गन्ने, बाग बगीचों की खतौनिया लगाकर धान तोल करवा रहे है। मंडी में किसानों ने इस तरह के आरोप लगाकर सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिये है। किसानों का आरोप है कि लंबे समय से उनका धान नही तोला जा रहा है। जबकि मिलीभगत कर धान खरीद में अन्य फसलों की खतौनियां दर्शायी जा रही है। 

दीपावली पर अवकाश के बाद धान तोल शुरु की गई। सोमवार को मंडी में धान के काफी संख्या में ढेर लगे हुये  दिखे। यहां मौजूद किसानों ने कहा कि धान बिक्री में कई हफ्ते लग जा रहे है। जबकि बाहरी क्षेत्र से आये अनाज माफिया का धान तत्काल तोला जा रहा है। नयागांव निवासी गयासुद्दीन खांन ने आरोप लगाया कि बाहरी राज्यों से खरीदकर लाये धान को मंडी में बेचकर अनाज माफिया मोटा मुनाफा कमा रहे है। धान बिक्री के लिये गन्ने के खेतों, बाग-बगीचों की खतौनिया इस्तेमाल की जा रही है। जबकि अनाज माफिया जिस भूमि में धान की उपज दर्शा रहा है उस भूमि में बाग-बगीचे बने हुये है। डूब क्षेत्रों में गन्ने की फसले खड़ी है। इस तरह की भूमि की खतौनियां धान खरीद में प्रयोग लायी जा रही है। मिलीभगत के जरिये अनाज माफिया किसानों को बर्बाद करने में लगे हुये है। उन्होंने प्रशासन से मामले की गहनतापूर्वक जांच की मांग उठायी है। 

खसरे में चढ़ायी जाती है खेत की वास्तविक स्थिति

खेत की खतौनी में फसल, पेड़, पौधे, रास्ते, भवन किसी तरह का रिकार्ड दर्ज नही किया जाता है। जबकि खसरे में इस तरह की सभी जानकारी चढ़ायी जाती है। हर तीन माह में खसरे का रिकार्ड बनाया जा सकता है। धान तोल में अनाज माफिया खतौनी का सहारा लेकर लूट-खसौट करने में लगे है। जबकि तोल के दौरान खतौनी के साथ ही खसरे का रिकार्ड भी अगर लगाया जाता तो जमीन की वास्तविक स्थिति का आसानी से पता लगाया जा सकता था। 

तड़के यूपी बार्डरों से पहुंच रहा धान

अनाज माफिया तड़के ही यूपी से धान लेकर क्षेत्र में पहुंच रहे है। यूपी बार्डर में लगे सीसीटीवी कैमरों में इस तरह के सभी वाहन कैद होते है। इसके बाद माफिया के धान के ढेर कांटों में लगा दिये जाते है। जहां मिलीभगत के जरिये यूपी का धान राज्य सरकार के रेट में बिक्री हो जाता है और क्षेत्र के किसानों का धान समय पर नही बिक पाता। विवश होकर किसान धान सस्तेदामों में बाजार में बेच देते है।

राजस्व विभाग के पास हर फसल का क्षेत्रफल

धान, गेंहू की फसल का राजस्व विभाग के पास सारा रिकार्ड होता है। लेखपाल खेतों, किसानों का सर्वे कर खसरे में सभी तरह की फसलों को चढ़ाते है। इससे आसानी से अदांजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में धान की फसल का कितना रकबा है, और जो सरकारी कांटों में तोला जा रहा है वह रिकाडोüं से अधिक है या कम

एडीओ कोआपरेटिव अर्पणा का कहना है कि धान खरीद में नियमानुसार केवल खतौनी ही देखी है। संदेह होने पर ही खसरा देखा जाता है। इसके बाद भूमि का भी निरीक्षण किया जा सकता है। लेकिन अभी तक गन्ने, बाग-बगीचों की खतौनियों में धान तोल का कोई मामला सामने नही आया है। 

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