नैनी झील में सीप्लेन उतारने की योजना शुरू करने के विचार के विरोध में पर्यावरणविद

नैनी झील में सीप्लेन उतारने की योजना शुरू करने के विचार के विरोध में पर्यावरणविद

देश-दुनिया की प्रसिद्ध नैनी झील में सीप्लेन उतारने की योजना पर विचार मात्र ने पर्यावरणविदों को उद्वेलित कर दिया है। अहमदाबाद के साबरमती से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का संचालन कर रही स्पाइजेट की ओर से इस योजना का प्रस्ताव किया गया है।

Skand ShuklaWed, 03 Mar 2021 09:58 AM (IST)

नैनीताल, जागरण संवाददाता : देश-दुनिया की प्रसिद्ध नैनी झील में सीप्लेन उतारने की योजना पर विचार मात्र ने पर्यावरणविदों को उद्वेलित कर दिया है। अहमदाबाद के साबरमती से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का संचालन कर रही स्पाइजेट की ओर से इस योजना का प्रस्ताव किया गया है। स्पाइजेट का कहना है कि इसी साल उसे दो सीप्लेन मिलने वाले हैं, उनके लिए दिल्ली से नए मार्ग देख रही है। दिल्ली यमुना रिवर फ्रंट से टिहरी झील व नैनीताल की झील तक के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है। कंपनी की योजना से पर्यावरणविद व पर्यावरण प्रेमी खासे गुस्से में हैं। उनका कहना है कि यदि ऐसा होता है तो इसके विरोध में कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी ।

प्रसिद्ध पर्यावरणविद प्रो अजय रावत ने तो इस योजना को झील के अस्तित्व के लिए खतरनाक करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यदि सीप्लेन की उड़ान शुरू हुई तो मात्र पांच छह साल में ही नैनी झील का अस्तित्व मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से लगातार झील का जलस्तर घट रहा है। बारिश व बर्फबारी कम होने व पानी की खपत बढ़ने के अलावा रिचार्ज जोन सूखाताल में मलबे की मोटी परत जमा होने से झील के रिचार्ज जोन सीमित हो गए हैं। झील में गिरने वाले नालों पर अतिक्रमण ने भी समस्या बढ़ रही है।

नाव चालक होंगे बेरोजगार

प्रो. रावत के अनुसार सीप्लेन चलने से नैनीताल के चप्पू बोट व पैडल बोट संचालक के साथ ही नौकायन के लिए प्रेरित करने वाले गाइडों के करीब एक हजार से अधिक परिवारों की रोजी रोटी छीन जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार को झील संरक्षण के बजाय झील का अस्तित्व मिटाने की योजना पर काम नहीं करना चाहिए। संकेत दिए कि योजना आगे बढ़ी तो इसका कानूनी तरीके से भी विरोध किया जाएगा। प्रो रावत ने रानीबाग से हनुमानगढ़ तक प्रस्तावित रोप वे के विरोध में भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की। पिछले दिनों स्पाइसजेट के सीएमडी अजय सिंह ने कहा था हमें तो सीप्लेन मिल रहे हैं, उन्हें अंडमान और उत्तराखंड में में तैनात कर रहे हैं। '

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