नौनिहालों की थाली से अंडा, दूध और केला गायब, बाल पालाश एवं आंचल अमृत योजना ठप

नौनिहालों को कुपोषण से दूर रखने के लिए एवं पोषक तत्वों को और सुदृढ़ बनाने के लिए बाल पालाश व आंचल अमृत योजना का शुभारंभ कर दिया। दो साल भी योजना का सफल संचालन नहीं हो सका। एक साल में ही योजना डंप कर दी गई।

Prashant MishraFri, 30 Jul 2021 06:08 AM (IST)
बच्चों को सप्ताह में चार दिन उबले अंडे, दो केले एवं सप्ताह में दो दिन 100 ग्राम दूध देना था।

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर : उत्तराखंड सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा और दूध देने का फैसला लिया था। नौनिहालों को कुपोषण से दूर रखने के लिए एवं पोषक तत्वों को और सुदृढ़ बनाने के लिए बाल पालाश व आंचल अमृत योजना का शुभारंभ कर दिया। दो साल भी योजना का सफल संचालन नहीं हो सका। एक साल में ही योजना डंप कर दी गई।

ऊधमङ्क्षसह नगर के 10 परियोजनाओं में 2387 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें सात माह से तीन वर्ष तक के 98 हजार 451, तीन से छह वर्ष के 53 हजार 292, गर्भवती 21057 और धात्री 17942 पंजीकृत हैं। इनमें 3648 कुपोषित एवं 292 बच्चे अतिकुपोषित की श्रेणी में हैं। दिसंबर, 2019 में ऊधमङ्क्षसह नगर सहित अन्य जनपदों में कुपोषण की स्थिति को देखते हृुए सीएम ने बाल पालाश योजना एवं आंचल अमृत योजना का शुभारंभ किया था। इसके अंतर्गत तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को सप्ताह में चार दिन उबले अंडे, दो केले एवं सप्ताह में दो दिन 100 ग्राम प्रति बच्चे के हिसाब से दूध वितरण किया जाना था। मार्च, 2021 में बच्चों के थाली से अंडा, दूध और केला गायब हो गया।

वर्तमान में आंगनबाड़ी के बच्चों को टीएचआर एवं ऊर्जा के अलावा अतिरिक्त खान पान कुछ नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में अंडा, दूध और केला देने से जो आंकड़ें अतिकुपोषित के साढ़े तीन सौ के पार थे, वह वर्तमान में 292 हो चुके हैं। अब स्थिति सुधरने की ओर थी तो योजना धराशाई हो गया। बच्चों को पोषाहार देने वाली योजना के ठप होने से उन्हें कुपोषण से बचाने की मुहिम को धक्का लगेगा। ऐसे में गोद लेना उन्हें पढ़ाई व खेल के लिए तैयार करने की बात बेमानी साबित होगी।

डीपीओ उदय प्रताप ङ्क्षसह ने बताया कि बाल पलास योजना एवं आंचल अमृत योजना बजट के अभाव में मार्च से बंद है। जल्द ही बजट मिलने की संभावना है। जिसके बाद वितरण कार्य आरंभ हो जाएगा।

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