नैनीताल में आपदा के चलते बाहर निकलना मुश्किल, चार दिन बाद डीआइजी के निर्देश पर एसडीआरएफ ने किया अंतिम संस्कार

आपदा में पैदल रास्ता पूरी तरह बह गया है। इस वजह से अब तक अंतिम संस्कार के लिए शवों को नहीं उठाया जा सका है। पैदल व सड़क मार्ग बंद है। मजदूर मिल नहीं रहे हैं। ग्रामीणों की मदद से एसडीआरएफ के जवान शवों को लेकर श्मशान घाट ले गए।

Prashant MishraFri, 22 Oct 2021 06:28 PM (IST)
एसडीआरएफ ने आपदा में मृतक पति पत्नी का तल्ला रामगढ में विधि विधान से अंतिम संस्कार किया।

जागरण संवाददाता, नैनीताल : जिले में आपदा प्रभावित कुदरत के जख्म ताउम्र नहीं भूल पाएंगे। आपदा ने मृतकों के अंतिम संस्कार तक रोकना पड़ा है और स्वजन अपनों के शव के साथ रहने को मजबूर थे।। जागरण ने मामले को डीआईजी नीलेश आनंद के समक्ष रखा तो उन्होंने एसडीआरएफ को अंतिम संस्कार के निर्देश जारी किए। दोपहर बाद एसडीआरएफ ने आपदा में मृतक पति पत्नी का तल्ला रामगढ में विधि विधान से अंतिम संस्कार किया। 

रामगढ़ के झुतिया की अनुसूचित बस्ती भूमियां गधेरा में मंगलवार तड़के तीन बजे अतिवृष्टि में 56 वर्षीय मोहन राम का घर पानी के तेज बहाव में बह गया। इस आपदा में मोहन राम के साथ उनकी 50 वर्षीय पत्नी दमयंती देवी, 28 वर्षीय बेटा देवेंद्र मौत के मुंह में समा गए। आपदा में मकान पूरी तरह बह गया था। ग्रामीणों व सरकारी टीम ने गुरुवार को पति पत्नी के शव गधेरे से बरामद किये जबकि बेटे के शव का अब तक अतापता नहीं है। पोस्टमार्टम किया। शाम तीन बजे सरकारी अमला पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर लौट गया। शुक्रवार सुबह ग्राम प्रधान सुरेश मेर व समाजसेवी धीरज शर्मा ने जागरण से सम्पर्क कर मदद मांगी। उन्होंने बताया कि श्मशान घाट तल्ला रामगढ़ है, जो घटनास्थल से पैदल करीब 5 किलोमीटर जबकि सड़क से आठ किलोमीटर दूर है। पैदल रास्ता तथा गांव को जोड़ने वाली दोनों सड़कें अवरुद्ध हैं। साथ ही पैदल रास्ता पूरी तरह बह गया है। इस वजह से अब तक अंतिम संस्कार के लिए शवों को नहीं उठाया जा सका है। पैदल व सड़क मार्ग बंद है। मजदूर मिल नहीं रहे हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से जल्द सड़क खोलने की मांग करते करते थक गए हैं लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं है। प्रशासन से भी संपर्क साधा गया है।

इसके बाद जागरण ने यह मामला डीआईजी के समक्ष रखा तो उन्होंने आज ही हर हाल में विधि विधान से अंतिम संस्कार के निर्देश दिए। दोपहर बाद ग्रामीणों की मदद से एसडीआरएफ के जवान क्षतिग्रस्त रास्ते से दोनों शवों को लेकर तल्ला रामगढ श्मशान घाट ले गए और विधि विधान से अंतिम संस्कार किया।  प्रधान ने बताया कि दम्पती का एक बेटा नवीन दिल्ली में नौकरी करता है। अब वो ही बचा है। जानकारी मिलने के बाद वह गांव लौट आया है। राहत बचाव में ग्रामीण राहुल पांडे, प्रतीक बिष्ट, दीपक पांडे व अन्य शामिल थे। उधर रामगढ में ही आपदा में मृतक मजदूरों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद हल्द्वानी के लिए एयरलिफ्ट किया जा रहा है।

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