हल्द्वानी के पांच बड़े गांवों से शुरू होगा पंचायतों का विकास

ग्राम पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है।

ग्राम पंचायतों के विकास को लेकर प्लान तैयार हो चुका है। पेयजल टैंक सड़क गूल निर्माण के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर खासा फोकस किया जाएगा। सामूहिक व व्यक्तिगत सोख्तों के जरिये बारिश व घरों से निकलने वाले पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा।

Prashant MishraWed, 24 Feb 2021 07:30 AM (IST)

हल्द्वानी, गोविंद बिष्ट। स्वजल योजना के तहत ग्राम पंचायतों के विकास को लेकर प्लान तैयार हो चुका है। पेयजल टैंक, सड़क, गूल निर्माण के साथ ही मैदानी क्षेत्रों में जल संरक्षण को लेकर खासा फोकस किया जाएगा। सामूहिक व व्यक्तिगत सोख्तों के जरिये बारिश व घरों से निकलने वाले पानी को जमीन के अंदर पहुंचाया जाएगा। ताकि भूजल स्तर बढ़ सके। हल्द्वानी ब्लाक के पांच बड़े गांवों से विकास की शुरुआत होगी। इसके बाद 55 अन्य ग्राम पंचायतें भी स्वजल योजना में शामिल होंगी।

स्वजल योजना के तहत ग्राम पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने को लेकर कवायद शुरू हो चुकी है। नैनीताल जिले के सभी आठ ब्लाक में विकासखंड अधिकारी बैठकों के जरिए ग्रामीणों के बीच योजना की पूरी जानकारी पहुंचा रहे हैं। बीडीओ डा. निर्मला जोशी ने बताया कि सीडीओ नरेंद्र सिंह भंडारी के निर्देश पर हल्द्वानी ब्लाक के पांच गांव प्रेमपुर लोश्ज्ञानी, नाथूपुर पाडली, बमेठा बंगर केशव, हाथीखाल व हरिपुर तुलाराम का प्रथम चरण में चयन किया गया है। प्रेमपुर लोश्ज्ञानी आबादी के लिहाज से ब्लाक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है। अनुसूचित बहुल क्षेत्र के हिसाब से नाथूपुर पाडली को चुना गया है। पानी का जमीनी संरक्षण होने पर सड़कें व गलियां बरसात के दिनों में तालाब में तब्दील नहीं होगी।

गरीब को अनुदान, सक्षम को जागरूक अफसरों के मुताबिक स्वजल के तहत 100 प्रतिशत सोख्ते का निर्माण किया जाएगा। भाबर क्षेत्र के गिरते जलस्तर को बढ़ाने के लिए यह जरूरी है। गांव में रहने वाले गरीब लोगों को सोख्ते के लिए सरकारी अनुदान मिलेगा। जबकि जिन संपन्न लोगों के वहां यह व्यवस्था नहीं है। उन्हें वर्षा व व्यर्थ जल के संरक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा। जागरूकता बैठकों का दौर शुरू हो चुका है।

सीडीओ नैनीताल नरेंद्र भंडारी का कहना है कि पहाड़ पर सोख्ते की जरूरत नहीं। लेकिन मैदानी क्षेत्रों में यह काफी कारगर साबित होंगे। स्वजल के तहत सभी गांव शामिल होंगे। इसके अलावा बायो गैस उत्पादन को लेकर हल्द्वानी में दो जगह चिन्हित हो चुकी है। जल संरक्षण को लेकर लोगों को भी जागरूक होना चाहिए।

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