कंपनियों के नाम पर फर्जी हेल्पलाइन चला रहे साइबर अपराधी, लोगों को जागरूक करने में जुटी पुलिस

अब साइबर ठगों ने ठगी के लिए नामी कंपनियों के हेल्पलाइन का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है।

जिले में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। पहले बैंक कर्मी व कस्‍टमरकेयर बनकर ठगी करते थे वहीं अब नेट बैंकिंग ऑनलाइन खरीददारी के साथ ही साइबर ठग फर्जी फेसबुक आइडी बनाकर परिचितों से रुपयों की मांग कर ठगी कर रहे है।

Prashant MishraSat, 16 Jan 2021 12:44 PM (IST)

जागरण संवाददाता, रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) :  नामी कंपनियों के नाम पर साइबर अपराधी फर्जी हेल्पलाइन चला रहे हैं। हेल्पलाइन में काल करने वाले लोग अपनी जमा पूंजी से हाथ धो रहे हैं। पुलिस के पास ऐसे मामले आने के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू करने के साथ ही इंटरनेट मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक करना शुरू कर दिया है।

जिले में साइबर अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। कभी बैंक कर्मी बनकर खाता और एटीएम की जानकारी के साथ ही झांसे में लेकर ओटीपी के जरिए लोगों के खाते खाले कर रहे हैं। इसके अलावा नेट बैंकिंग, ऑनलाइन खरीददारी के साथ ही साइबर ठग फर्जी फेसबुक आइडी बनाकर परिचितों से रुपयों की मांग कर ठगी कर रहे है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अब साइबर ठगों ने ठगी के लिए नामी कंपनियों के हेल्पलाइन का भी सहारा लेना शुरू कर दिया है। इसके लिए उन्होंने गूगल पर अलग अलग नामी कंपनियों के नाम पर फर्जी हेल्पलाइन शुरू किया हैं। जिसमें कंपनी की हेल्पलाइन में मदद मांगने के लिए काल करने वाले लोग ठगों के झांसे में आ रहे है।

साइबर सेल कर्मी चंदन बिष्ट ने बताया कि हेल्पलाइन में काल करने पर लोग ठगों को अपना खाता, ओटीपी सहित अन्य जानकारी दे रहे है। जिससे वह अपनी जमा पूंजी खो रहे हैं। बीते कुछ दिनों के भीतर साइबर सेल में जिले भर से ऐसी कई शिकायत आ चुकी है। इसे देखते हुए ऊधमसिंहनगर पुलिस और साइबर सेल लोगों को इंटरनेट मीडिया के जरिये जागरूक करने में जुटी हुई है।

एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने बताया कि साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जिले में साइबर थाना और साइबर सेल काम कर रही है। साइबर ठग नामी कंपनियाें के नाम पर भी फर्जी हेल्पलाइन बनाकर धोखाधड़ी कर रहे हैं। इस पर पुलिस काम कर रही है, साथ ही लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

इन बातों का रखा ध्यान

- किसी भी हेल्पलाइन का नंबर इंटरनेट से लेने से बचें

- 10 और पांच रुपये का पेमेंट करने के बाद आनलाइन बढ़ाने की बात कह यूपीआई संबंधित जानकारी मांगे तो उसे सांझा न करें

- साइबर अपराधी खुद को किसी फर्म या बैंक अधिकारी या कर्मचारी बताकर यूपीआई नंबर और पासवर्ड मांगे तो उसे न बताएं

- अज्ञात व्यक्ति के कहने पर बैंक में रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से न तो डाउनलोड करें और न उसे किसी से शेयर करें।

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