क्रिकेट कमेंटेटर चारू शर्मा की पिंडारी यात्रा फिर रह गई अधूरी, परिवार संग पहुंचे थे बागेश्वर

भारतीय कमेंटेटर चारु शर्मा पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा में पर 17 अक्टूबर को निकले थे। वह खरकिया में वाहन खड़ा करने के बाद खाती पहुंच गए। उनके साथ उनके बेटे देवेश्वर और धुव्र शर्मा भी थे। उन्होंने बताया कि वह जब 1974 में राजस्थान से पढ़ाई कर रहे थे।

Prashant MishraMon, 25 Oct 2021 02:59 PM (IST)
बताया कि 17,18,19 लगातार बारिश के कारण खाती गांव से बाहर नहीं निकल सके। 20 अक्टूबर को उन्होंने ट्रैक किया।

जागरण संवाददाता, बागेश्वर : भारतीय किक्रेट कमेंटेटर चारु शर्मा पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा को आए थे। लेकिन मौसम खराब होने के कारण वह यात्रा पूरी नहीं कर सके। साथ में दो बेटे भी शामिल थे। खरकिया के समीप उनका वाहन खड़ा था।रानीखेत से जिला प्रशासन को उनके स्वजनों का फोन आने पर प्रशासन भी अलर्ट हो गया। 

भारतीय कमेंटेटर चारु शर्मा पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा में पर 17 अक्टूबर को निकले थे। वह खरकिया में वाहन खड़ा करने के बाद खाती पहुंच गए। उनके साथ उनके बेटे देवेश्वर और धुव्र शर्मा भी थे। उन्होंने बताया कि वह जब 1974 में राजस्थान से पढ़ाई कर रहे थे। उस समय भी पिंडारी ग्लेशियर की यात्रा के लिए आए थे। तब भी वह पिंडारी की यात्रा पूरी नहीं कर सके। इस बार भी बेटों के साथ थे। लेकिन यात्रा अधूरी रही। बताया कि जब उनको उत्तराखंड में हाइ-अलर्ट की जानकारी मिली तो वह खाती गांव में रुक गए। यहां लोगों ने उनका बहुत आदर सत्कार दिया। स्वादिष्ट खाना खिलाया। उन्होंने बताया कि 17,18,19 लगातार बारिश के कारण खाती गांव से बाहर नहीं निकल सके। 20 अक्टूबर को उन्होंने लोकल में एक ट्रैक किया।

21 को सुंदरढुंगा घाटी में जांतोली के ट्रैक पर गए। 20 को धाकुड़ी पहुंचे। वहां लोनिवि आवास में रुके। 23 को सुबह, धाकुड़ी टॉप और फिर घर को निकल गए थे।उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा के दौरान लोकल गाइड प्रकाश दानू और उनके मित्र सुमित गोयल ने उनकी काफी मदद की। जिला प्रशासन ने भी उनकी काफी मदद की। उन्होंने बताया की जब उनको पता लगा कि सुंदरढूंगा यात्रा के दौरान कुछ लोग की मौत हो गई तो इसका उनको बेहद दुख हुआ। उनको पहाड़ के लोगों का आदर-सत्कार और व्यवहार काफी अच्छा लगा। इधर, एसडीएम पारितोष वर्मा ने बताया कि रानीखेत से सुनित गोयल नाम के व्यक्ति का फोन जिला प्रशासन को आया था। प्रशासन ने भी उन्हें सहयोग किया और वह वापस लौट गए हैं।

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